
नोएडा की सबसे बड़ी ठगी करने वाले पकड़े गए, चीन का भी निकला कनेक्शन
साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने चीन के ठग गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर जालसाजी करते थे। उन्होंने बीते दिनों इंजीनियरिंग कंसलटेंसी से जुड़े व्यक्ति से 12 करोड़ रुपये ऐंठे थे।
साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने चीन के ठग गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर जालसाजी करते थे। उन्होंने बीते दिनों इंजीनियरिंग कंसलटेंसी से जुड़े व्यक्ति से 12 करोड़ रुपये ऐंठे थे। माना जा रहा है कि नोएडा में किसी एक शख्स हुई यह अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी है।
एडिशनल डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि इसी माह की तीन तारीख को साइबर क्राइम थाने में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ठगों ने निवेश करने पर मुनाफा कमाने का झांसा देकर उनसे करीब 12 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पुलिस टीम ने जब मामले की जांच शुरू की तो विवेचना के दौरान अर्जुन सिंह, पंकज गुप्ता, रुपेंद्र पाल और तेजपाल के नाम सामने आए, सभी बदायूं के रहने वाले हैं। पुलिस टीम ने शनिवार को चारों को दबोच लिया। तेजपाल मुख्य आरोपी है और उसका संबंध चीन के गिरोह से है।
आरोपियों ने शेयर बाजार में निवेश कर लाभ कमाने के नाम पर देशभर के लोगों के साथ ठगी की। गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। चीन के जिस गिरोह से आरोपियों का लिंक सामने आया है, वह लोगों से 35 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। यह रकम आरोपियों के खातों में आई थी। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल को भी कब्जे में ले लिया है। ठगी में संलिप्त बैंक खातों को पुलिस पहले ही फ्रीज करवा चुकी थी। कुछ रकम को भी होल्ड कराया गया था। आरोपियों के खिलाफ बिहार और दिल्ली में भी केस दर्ज हैं।
जालसाजी करने के लिए 60 खाते खुलवाए
धोखाधड़ी से संबंधित बैंक खाते मे आई राशि का सात से दस प्रतिशत नकद प्राप्त कर तेजपाल अपने पास रख लेता था। वह तीन से पांच प्रतिशत खाताधारकों एवं मध्यस्थ को दे देता। विवेचना के दौरान पाया गया है कि गैंग द्वारा लगभग 50 से 60 बैंक खाते धोखाधड़ी में इस्तेमाल करने के लिए खुलवाए गए।
मोबाइल से राज खुलेंगे
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के पास से पांच आईफोन भी बरामद हुए हैं। आशंका है कि मोबाइल में ठगी से संबंधित कई अहम जानकारी हैं। पुलिस जांच के लिए मोबाइल को फॉरेंसिक लैब भेजेगी। तेजपाल ने अपने गांव के कई अन्य बेरोजगारों युवकों को भी ठगी करने वाले गिरोह से जोड़ा। सभी आरोपी पढ़े-लिखे हैं। बारहवीं और स्नातक करने के बाद युवकों ने नौकरी तलाश की। रोजगार नहीं मिलने पर वे सोशल मीडिया के माध्यम से गिरोह के सदस्यों के संपर्क में आए और जालसाजी करने लगे।
आरोपी पिछले एक वर्ष से कर रहे थे जालसाजी
सभी आरोपी बीते एक साल से साइबर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े हैं। देश के विभिन्न राज्यों मे इनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। रुपेंद्र पाल और तेजपाल का नाम साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक मामले में पहले भी सामने आ चुका है। इसमें पीड़ित के साथ निवेश के नाम पर दो करोड़ 90 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी।
लोगों के नाम पर फर्म खोलीं
पुलिस ने सबसे पहले अर्जुन सिंह की गिरफ्तारी की। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि पंकज गुप्ता के कहने पर वह रुपेंद्र और तेजपाल के संपर्क में आया। रुपेंद्र और तेजपाल स्थानीय लोगों को कमीशन देने के नाम पर उनकी जीसटी तथा उद्यम प्रमाणपत्र बनवाकर फर्म खुलवाते। इसके बाद उनका चालू बैंक खाता खुलवाया जाता है। तेजपाल के कहने पर रुपेंद्र खाताधारक को अपने साथ मुंबई ले जाता। फिर अन्य साथियों की मदद से विभिन्न बैंक खातों में ठगी की राशि स्थानांतरित करते।
43 शिकायतें दर्ज मिलीं
ठगी में इस्तेमाल आरोपियों के बैंक खातों को जब एनसीआरपी पोर्टल पर चेक किया गया तो उन पर 43 शिकायतें विभिन्न राज्यों में दर्ज मिलीं। तेलंगाना में नौ, हरियाणा में आठ, महाराष्ट्र में चार, राजस्थान में एक, आंध्रप्रदेश में दो, कर्नाटक और गुजरात में पांच-पांच, केरल में तीन और दिल्ली में चार शिकायतें दर्ज मिली हैं। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में हुई करीब 17 करोड़ रुपये की ठगी में हुआ। खाते निवेश और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी में इस्तेमाल किए गए।
सामान्य सेवा केंद्र भी चलाता है मुख्य आरोपी
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी तेजपाल सामान्य सेवा केंद्र भी (सीएससी) चलाता है। पंकज का दूध का कारोबार है। रुपेंद्र की दूध की डेयरी है। वहीं, अर्जुन हिमाचल प्रदेश की एक एल्युमिनियम फैक्टरी में काम करता है।





