500 गज तक के घरों को हर महीने 10 हजार लीटर फ्री पानी, गुरुग्राम के 3 लाख घरों को मिलेगा लाभ
हरियाणा सरकार ने शहरी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 500 गज तक के रिहायशी मकानों को हर महीने 10 हजार लीटर (10 किलोलीटर) पेयजल मुफ्त देने की घोषणा की है। अब तक लोगों से एक रुपये प्रति किलोलीटर के हिसाब से पानी का बिल वसूला जाता था।

हरियाणा सरकार ने शहरी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 500 गज तक के रिहायशी मकानों को हर महीने 10 हजार लीटर (10 किलोलीटर) पेयजल मुफ्त देने की घोषणा की है। अब तक लोगों से एक रुपये प्रति किलोलीटर के हिसाब से पानी का बिल वसूला जाता था।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को विधानसभा में इस बार का बजट पेश करते हुए यह घोषणा की, जिसे नए वित्त वर्ष से शहरी स्थानीय निकाय विभाग लागू करेगा। इस योजना का लाभ गुरुग्राम में 3 लाख से अधिक मकान मालिकों को मिलने की उम्मीद है। हालांकि योजना का फायदा लेने के लिए घरों में पानी का मीटर लगवाना अनिवार्य होगा। बिना मीटर के मुफ्त पानी की सुविधा नहीं मिलेगी।
पानी की बर्बादी को रोकना मसकद
गुरुग्राम नगर निगम में 92 हजार मकान मालिकों ने ही अपने घरों में पानी के मीटर लगवाए हुए हैं। पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार ने घरों में मीटर लगवाने के लिए इस योजना की घोषणा की है। नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि मुफ्त पानी की योजना के साथ अनिवार्य पानी के मीटर लागू होने से अवैध कनेक्शनों पर रोक लगेगी।
निगम क्षेत्र में डेढ़ लाख से अधिक अवैध कनेक्शन
गुरुग्राम में पेयजल व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। नगर निगम के ताजा सर्वे के अनुसार शहर में डेढ़ लाख से अधिक अवैध पेयजल कनेक्शन चल रहे हैं, जो निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं। इन कनेक्शनों के जरिये बड़े पैमाने पर पानी की चोरी हो रही है, जिसका सीधा असर निगम की आर्थिक स्थिति और शहर के सीमित जल संसाधनों पर पड़ रहा है। निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में कुल 1,91,143 वैध पेयजल कनेक्शन हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर बिना मीटर के संचालित हो रहे हैं। मीटरिंग न होने के कारण वास्तविक खपत का सही आकलन नहीं हो पा रहा और न ही बिलों की पूरी वसूली हो रही है।
उपभोक्ताओं पर अब भी 120 करोड़ का बकाया
स्थिति यह है कि नगर निगम हर साल लगभग 140 करोड़ रुपये का पानी का बिल जारी करता है, लेकिन रिकवरी महज 50 करोड़ रुपये के आसपास सिमट जाती है। डिफाल्टर उपभोक्ताओं पर 120 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया दर्ज है। वहीं निगम क्षेत्र में 7,09,102 प्रॉपर्टी आईडी दर्ज हैं। जब इनका मिलान जल कनेक्शनों से किया गया तो पाया गया कि करीब डेढ़ लाख संपत्तियां ऐसी हैं, जहां पानी का उपयोग तो हो रहा है, लेकिन निगम को कोई राजस्व नहीं मिल रहा।



