Hindi Newsएनसीआर News10 illegal colonies are being built every month on both sides of Yamuna river in Faridabad
फरीदाबाद में यमुना के दोनों ओर हर माह बसाई जा रहीं 10 अवैध कॉलोनियां, ऐसे फैल रहा नेटवर्क

फरीदाबाद में यमुना के दोनों ओर हर माह बसाई जा रहीं 10 अवैध कॉलोनियां, ऐसे फैल रहा नेटवर्क

संक्षेप:

दिल्ली से सटे एनसीआर के शहर फरीदाबाद में यमुना के दोनों ओर अवैध कॉलोनियों का फैलता जाल जिला प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, हर महीने करीब अवैध 10 कॉलोनियां बसाई जा रही हैं, जिससे अधिकारी भी हैरत में हैं।

Dec 15, 2025 10:06 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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दिल्ली से सटे एनसीआर के शहर फरीदाबाद में यमुना के दोनों ओर अवैध कॉलोनियों का फैलता जाल जिला प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है। डीटीपी इंफोर्समेंट विभाग की तोड़फोड़ के बावजूद यमुना के आसपास नई कॉलोनियों का बसना जारी है। अधिकारियों के अनुसार, हर महीने करीब अवैध 10 कॉलोनियां बसाई जा रही हैं, जिससे अधिकारी भी हैरत में हैं।

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स्मार्ट सिटी में खासकर नोएडा से सटे यमुना नदी के किनारे, भू-माफियाओं द्वारा सस्ती जमीन का लालच देकर बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही है। ये कॉलोनियां यमुना के डूब क्षेत्र में विकसित की जा रही हैं। डीटीपी इंफोर्समेंट से मिली जानकारी के अनुसार इन इलाकों में बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं, जिससे लोगों को कॉलोनियों के वैध होने का भ्रम होता है। खास बात यह कि इस साल अब तक हुई 100 से ज्यादा बड़ी कार्रवाई में जिन कॉलोनियों को ध्वस्त किया गया, उनमें करीब 70 फीसदी यमुना के आसपास क्षेत्र में ही बसाई जा रही थी।

यमुना तट पर बसे इलाके संवेदनशील : डीटीपी इंफोर्समेंट अधिकारी यजन चौधरी ने कहा कि यमुना के किनारे अवैध कॉलोनियों के बसने से सबसे बड़ा खतरा बाढ़ की स्थिति में सामने आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदी में बढ़ते कटाव और जलस्तर में बदलाव के कारण तटीय क्षेत्रों में निर्माण करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद प्लॉट खरीदने वाले लोग जोखिम से अनजान रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यमुना के तटबंधों के आसपास की जमीन तकनीकी रूप से निर्माण योग्य नहीं होती, क्योंकि यहां का मिट्टी ढांचा कमजोर और नमी अधिक होती है।

तोड़फोड़ के बाद भी नहीं रुक रहा कब्जों का खेल

डीटीपी इंफोर्समेंट के रिकॉर्ड के अनुसार, तीन महीने में फरीदाबाद-पलवल में 22 से अधिक जगहों पर संयुक्त कार्रवाई की गई है। कई सौ एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त भी करवाया गया, लेकिन कब्जाधारी और कॉलोनी डीलर लगातार नए ठिकाने तलाशकर निर्माण शुरू कर देते हैं। प्रशासन के एक अधिकारी बताते हैं कि जिन कॉलोनियों को गिराया जाता है, कई बार उनमें अगले ही सप्ताह नई डीपीसी और ईंटें फिर लग जाती हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि माफिया रात के समय प्लॉट काटते हैं। ज्यादातर जगहों पर सड़क, नाली और खंभे भी खड़े कर दिए जाते हैं ताकि खरीदारों को यह दिखाया जा सके कि कॉलोनी विकसित हो चुकी है।

ऐसे फैल रहा नेटवर्क

ब्रोकर गांवों में जाकर किसानों से जमीन खरीदते हैं या लंबे समय के लिए पट्टा ले लेते हैं। जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर लॉन्चिंग कर दी जाती है। सोशल मीडिया पर नदी दृश्य, कम खर्च में प्लॉट, फार्म हाउस जोन जैसे विज्ञापन चलाए जाते हैं। कई जगह केवल खंभे और कच्ची सड़क बनाकर इसे ‘रेडी टू मूव’ कॉलोनी बताकर बेच दिया जाता है।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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