जुबिन गर्ग मौत मामला: सुनवाई की रफ्तार से नाखुश है पत्नी, क्या बोले सरकारी वकील?
दिवंगत गायक जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग और लोक अभियोजक ( सरकारी वकील ) जियाउल कमर ने कामरूप महानगर जिला एवं सत्र न्यायालय में गायक की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई की धीमी गति पर सोमवार को नाखुशी जताई।

दिवंगत गायक जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग और लोक अभियोजक ( सरकारी वकील ) जियाउल कमर ने कामरूप महानगर जिला एवं सत्र न्यायालय में गायक की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई की धीमी गति पर सोमवार को नाखुशी जताई। कमर ने कोर्ट के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि नियमित सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है। आरोपी सुनवाई को लटकाने के लिए कई हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। लोक अभियोजक ने कहा कि जब तक अदालत सभी याचिकाओं का निपटारा नहीं कर देती, तब तक नियमित सुनवाई शुरू नहीं हो सकती।
दरअसल, आरोपियों की ओर से अदालत में कई याचिकाएं दायर किए जाने के कारण पूरी प्रक्रिया में देरी हुई है और सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। बता दें कि जुबिन की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह नॉर्थ-ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (एनईआईएफ) के चौथे संस्करण में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर गए थे। राज्य सरकार ने इसे हत्या का मामला बताया है और जुबिन की मौत के संबंध में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
वहीं, गरिमा ने भी सुनवाई में देरी पर नाखुशी जाहिर की। उन्होंने राज्य सरकार से सुनवाई के लिए त्वरित अदालत गठित करने की अपील की। गरिमा ने कहा कि आरोपी प्रक्रिया को लटका रहे हैं। हम दैनिक आधार पर सुनवाई के लिए त्वरित अदालत के गठन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी स्थापना नहीं हुई है। मैं सरकार से एक बार फिर इस संबंध में अनुरोध करती हूं।
गौरतलब है कि जुबिन की मौत से जुड़े मामले में एनईआईएफ के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत, जुबिन के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, उनके बैंड के दो सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी और अमृत प्रभा महंत, असम पुलिस के डीएसपी संदीपन गर्ग, जुबिन के पीएसओ नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य फिलहाल जेल में हैं।
श्यामकानु ने अपने बैंक खातों को डी-फ्रीज कराने के लिए याचिका दायर की है, जबकि शर्मा ने सिंगापुर की कोरोनर अदालत की कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज उपसलब्ध कराने का आग्रह करते हुए उन पर लगाई गई कुछ धाराएं हटाने की अपील की है। गोस्वामी ने भी इसी तरह की याचिका दायर कर मामले में उन पर लगाई गई कुछ धाराएं हटाने का अनुरोध किया है।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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