अब हिमालय भी नहीं रोक पाएगा भारत का रास्ता! सबसे ऊंचाई पर बनने वाला जोजिला टनल क्यों है इतना खास?
इस सुरंग का निर्माण आसान नहीं था। सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 20 से माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। साल में करीब 100 दिन इंजीनियरों और मजदूरों ने शून्य डिग्री से भी कम तापमान के बीच काम किया।

अब हिमालय पर्वत भी भारत का रास्ता नहीं रोक पाएगा। कल यानी मंगलवार, 9 जून का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। मंगलवार को सालों की कड़ी मेहनत और कई तरह की चुनौतियों से निपटने के बाद जोजिला टनल के 'ब्रेकथ्रू' यानी आर-पार खुदाई का काम पूरा होने जा रहा है। इसके साथ ही इस अहम प्रोजेक्ट के माइनिंग और खुदाई का चरण पूरा हो जाएगा, जो पूरे देश के लिए एक गौरव का क्षण होगा।
गौरतलब है कि 13 किलोमीटर से अधिक लंबी यह सुरंग पूरी होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। टनल की मदद से कश्मीर से लद्दाख तक साल भर पहुंचना संभव हो जाएगा। इससे पहले भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और खराब मौसम के कारण हर साल लद्दाख लंबे समय तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाता था। हालांकि अब पूरे साल कनेक्टिविटी बनी रहेगी। इसके अलावा इससे सफर का समय 3 घंटे से घटकर महज 15 मिनट हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग के पास बालटाल से शुरू होकर लद्दाख के द्रास सेक्टर के मीनामर्ग तक जाने वाली यह 13.153 किलोमीटर लंबी टनल भारत के इंजीनियरिंग चमत्कार का एक नमूना भी है। अधिकारियों ने बताया है सुरंग के कश्मीर और लद्दाख दोनों तरफ से काम कर रहे इंजीनियर और श्रमिक 9 जून को सुरंग में एक-दूसरे से मिलेंगे। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को प्रोजेक्ट के अंतिम ब्रेकथ्रू ब्लास्ट का शुभारंभ करेंगे।
सालों की मेहनत का परिणाम
इस अहम प्रोजेक्ट को 'मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' द्वारा तैयार किया जा रहा है। परियोजना की नींव 1 अक्तूबर 2020 को रखी गई थी। 14 अक्तूबर 2020 को निलग्रार सुरंग में पहली ब्लास्टिंग की गई थी। तब से ब्रेकथ्रू पूरा होने तक में कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 20 से माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। साल में करीब 100 दिन इंजीनियरों और मजदूरों ने शून्य से नीचे के तापमान में काम किया। वहीं पिछले 5 सालों में इस साइट पे 5 बड़े हिमस्खलन भी आए। 12 जनवरी 2023 को सरबल इलाके में आए भूस्खलन के बाद भारतीय सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 172 कर्मचारियों की जान बचाई थी। इसके बाद फरवरी 2024 और मार्च 2025 में भी भूस्खलन की वजह से नुकसान हुआ। हालांकि इसका निर्माण जारी रहा। एक और खास बात यह भी है कि टनल बनाने वाले कर्मचारियों में से 80 फीसदी कर्मचारी स्थानीय लोग हैं।
क्यों अहम है जोजिला टनल?
जोजिला टनल सेना के लिए वरदान से कम नहीं है। लद्दाख और देश की उत्तरी सीमा पर तैनात भारतीय सेना के लिए यह कॉरिडोर बेहद संवेदनशील और रणनीतिक है। इस टनल के शुभारंभ के बाद सैनिकों को राशन, गोला-बारूद और मूवमेंट के लिए मौसम के साफ होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा इसकी मदद से लद्दाख में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं सर्दियों में जरूरी चीजों की सप्लाई बनी रहेगी जिससे स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर खुलेंगे। प्रोजेक्ट के 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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