लड़ते-लड़ते थक गए होंगे, शांति बहाल करने के बारे में सोचें: SC ने कुकी और मेइती समूहों से कहा
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दोनों जातीय समूहों से कहा कि राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध करने से किसी का भला नहीं होगा तथा वे इन्हें फिर से खोलने की कोशिश करें।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मणिपुर में तीन साल से ज्यादा समय से जारी जातीय हिंसा में शामिल कुकी और मेइती समुदायों से कहा, ''आप लड़ते-लड़ते थक गए होंगे। शांति बहाल करने और सड़कों व राजमार्गों को चालू करने के बारे में सोचें।'' मई 2023 में इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती और आस-पास की पहाड़ियों पर रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से 260 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दोनों जातीय समूहों से कहा कि राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध करने से किसी का भला नहीं होगा तथा वे इन्हें फिर से खोलने की कोशिश करें। पीठ ने कहा, ''आप लड़ते-लड़ते थक गए होंगे। दोनों ही गुटों ने बहुत मुश्किलें झेली हैं। शांति बहाल करने और सड़कों व राजमार्गों को चालू करने के बारे में सोचिए। राजमार्ग किसी भी इलाके की जीवनरेखा होते हैं क्योंकि जरूरी सामान इन्हीं से होकर गुजरता है।''
कोर्ट ने याचिकाकर्ता 'कुकी वीमेन ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' (जो 'कुकी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट' यानी कोहुर का एक हिस्सा है) और हस्तक्षेपकर्ता 'इंटरनेशनल मेइती ऑर्गनाइज़ेशन' से यह बात कही। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''यह मुद्दा बहुत वास्तविक है और राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करना एक गंभीर मामला है, लेकिन राजमार्ग खुलवाने के लिए अदालत के दखल देने से लोगों की जान जा सकती है।''
पीठ ने दोनों गुटों से कहा कि वे दो हफ़्ते के अंदर राज्य में बंद सड़कों की जानकारी दें और उन्हें फिर से खोलने के बारे में सुझाव भी दें। शीर्ष अदालत ने उनसे कहा, ''हम यह पक्का करेंगे कि दोनों गुट राजमार्ग खोलने की दिशा में काम करेंगे''। इसने केंद्र सरकार तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को याचिका में पक्षकार बनाया।
याचिकाकर्ता कुकी समूह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि वे किसी भी तरह की हिंसा और हत्याओं के खिलाफ हैं तथा शांति बहाली, सड़कों और राजमार्गों को खोलने के पक्ष में हैं, लेकिन मेइती समुदाय कई रास्तों को रोक रहा है, जिससे ज़रूरी सामान की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।
मेइती समूह की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि कुकी समूह की ओर से दायर याचिका 'शरारतपूर्ण' है, क्योंकि वही लोग राज्य में सभी राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर रहे हैं तथा लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। वकील ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से सड़कें खोलने की अपील के बावजूद कुकी समुदाय के लोग सड़कों को अवरुद्ध कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि यह मामला सिर्फ़ आरोप-प्रत्यारोप का नहीं हो सकता और शांति बहाल करने के लिए दोनों गुटों को कोई स्थायी समाधान निकालना होगा।
हस्तक्षेप की अर्जी को मंजूरी देते हुए, पीठ ने मेइती समूह के वकील से कहा कि वह उन सड़कों की जानकारी देते हुए एक नयी याचिका दायर करें जो बंद हैं, और साथ ही उन्हें पक्षकार ज्ञापन में बदलाव करने की भी अनुमति दे दी। याचिकाकर्ता कुकी महिला समूह ने अपनी याचिका में इंफाल को नगालैंड के दीमापुर से जोड़ने वाले एचएच-2 पर लगे अवरोध को हटाने और कुकी-बहुल इलाकों में आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।


