यह तो खतरनाक ट्रेंड है, आप कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं; CM हिमंता से जुड़े केस में बिदके CJI सूर्यकांत
CJI ने कहा कि आजकल हर मामले में खासकर चुनाव से पहले, सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जो परेशान करने वाला है। इसके बाद CJI ने कहा कि आप हाई कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं। HC को कम मत आंकिए।

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार (16 फरवरी) को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित तौर पर उनके हेट स्पीच की वजह से कार्रवाई करने की मांग की गई थी। ये याचिका CPI (M) के नेता एनी राजा और असमिया विद्वान हिरेन गोहैन ने दाखिल की थी। याचिका में मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ कथित हेट स्पीच की घटनाओं को लेकर पुलिस केस दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई थी।
याचिका में जिन घटनाओं पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की असम यूनिट द्वारा जारी किया गया एक वीडियो भी शामिल है, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता सरमा मुसलमानों की एक तस्वीर पर गोली चलाते हुए दिख रहे हैं। उससे पहले मिया, यानी बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के बारे में कमेंट किए गए थे, जिन्हें BJP ने "गैर-कानूनी घुसपैठिए" कहा है।
एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है
हालांकि, CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि आप गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? चीफ जस्टिस ने पिटीशनर्स से पूछा, "आपने पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?" CJI ने कहा कि आजकल हर मामले में, खासकर चुनाव से पहले, सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जो परेशान करने वाला है। इसके बाद CJI ने कहा, “आप (गुवाहाटी) हाई कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं। हमारे हाई कोर्ट्स की वैलिडिटी को कम मत आंकिए।”
HC से जल्द सुनवाई करने को कहा
शीर्ष अदालत ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर संबंधित उच्च न्यायालय प्रभावी रूप से फैसला कर सकता है। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि वह इस मामले को सुनवाई करने का कोई ठोस कारण नहीं देखती और याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया। साथ ही उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले की जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया गया क्योंकि वकीलों ने मामले में अरजेंसी बताई है।
“शॉर्टकट” के पक्ष में नहीं
बार एंड बेंच के मुताबिक, पीठ ने ये भी स्पष्ट किया कि हालांकि उसके पास सीधे सुनवाई करने का अधिकार है, लेकिन वह ऐसे “शॉर्टकट” के पक्ष में नहीं है, जहां याचिकाएं पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएं और उच्च न्यायालय को नजरअंदाज किया जाए। अदालत ने कहा कि किसी एक अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने की जल्दबाजी में दूसरे के अधिकार क्षेत्र को कमजोर नहीं किया जा सकता और सुप्रीम कोर्ट सभी मामलों का मंच नहीं बन सकता।
क्या है मामला?
दरअसल, ये याचिकाएं असम में सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा साझा एक विवादित वीडियो से भी जुड़ी थीं, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को एक विशेष समुदाय के लोगों पर गोली चलाते दिखाया गया था। वीडियो में “प्वाइंट ब्लैंक शॉट” और “नो मर्सी” जैसे शब्द भी लिखे गए थे। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि “चार से पांच लाख मिया वोटरों” को मतदाता सूची से हटाया जाएगा और वह और उनकी पार्टी मियाओं के खिलाफ हैं। “मिया” शब्द का इस्तेमाल मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप में किया जाता है।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




