'आप अंडों से डरती हैं? लोगों ने सीने पर गोलियां खाई थीं'; SC ने महुआ मोइत्रा को लगाई फटकार

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने वर्चुअली पेशी की मांग खारिज करते हुए कहा कि जब स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां खाईं, तो राजनीति में आकर अंडों से क्या डरना?

अंडों का डर बताकर वर्चुअली पेशी चाहती थीं महुआ मोइत्रा, सुप्रीम कोर्ट से मिला करारा झटका
अंडों का डर बताकर वर्चुअली पेशी चाहती थीं महुआ मोइत्रा, सुप्रीम कोर्ट से मिला करारा झटका

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। एक विवादित फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में पुलिस के सामने ऑनलाइन पेश होने की उनकी मांग को सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मोइत्रा को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि राजनीति में आने के बाद उन्हें अंडों से डरने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मोइत्रा की उस चिंता को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिस स्टेशन जाने पर अंडे फेंके जाने का डर जताया था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दत्ता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "आप एक सांसद हैं? राजनीति में कदम रखने के बाद क्या आप अंडों से डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो अपने सीने पर गोलियां खाई थीं। इस तरह की याचिकाएं तो अदालत के सामने आनी ही नहीं चाहिए।"

क्या है पूरा मामला?

यह मामला इस साल जून महीने का है। मोइत्रा के खिलाफ एक बीजेपी नेता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए अपने दो वीडियो में भड़काऊ टिप्पणी की थी। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब कृष्णानगर में एक अदालत के बाहर बीजेपी समर्थक कथित तौर पर टमाटर और अंडे लेकर इकट्ठा हुए थे, ताकि वे इसे मोइत्रा पर फेंक सकें।

वकील ने दी 'मॉब अटैक' की दलील

सुप्रीम कोर्ट में महुआ मोइत्रा का पक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने रखा। उन्होंने अदालत से अपील की कि मोइत्रा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच अधिकारी के सामने पेश होने की इजाजत दी जाए।

जब अदालत ने पूछा कि, 'वर्चुअली क्यों? क्या इसलिए कि आप एक सांसद हैं?', तो वकील ने भीड़ के हमले की आशंका जताई। उन्होंने दलील दी, "मुझे कानून के तहत अधिकार मिला हुआ है। पुलिस के नोटिस के मुताबिक, मुझे अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में पेश होना है। पिछली बार जब मैं वहां गई थी, तो अंडे फेंकने की धमकियां दी गई थीं और दूसरी बार सच में अंडे फेंके गए थे।"

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट मोइत्रा के वकील की दलीलों से सहमत नहीं हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही उन्हें जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दे चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "आदेश का पैरा 19 पढ़िए। अगर आप पेश नहीं होती हैं, तो हाईकोर्ट के सामने इसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। अगर आपको कोई परेशानी है, तो वहां जाएं।"

बता दें कि पिछले महीने कलकत्ता हाईकोर्ट ने मोइत्रा को उनकी याचिका पर अंतरिम राहत दी थी, लेकिन साथ ही 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश भी दिया था। सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख देखने के बाद मोइत्रा के वकील ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया।

Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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