ये तो संसदीय परंपराओं का घोर उल्लंघन, PM मोदी के खिलाफ लें ऐक्शन; अब स्पीकर के पास क्यों पहुंची कांग्रेस? क्या मांग
Privilege Notice Against PM Modi: प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को चेताया था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण संबंधी संशोधन का विरोध करके उसने 'भ्रूण हत्या का पाप' किया है।

Privilege Notice Against PM Modi: देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मंगलवार (21 अप्रैल) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया और आरोप लगाया कि सदन में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी दलों पर आक्षेप लगाया, जो सदन के विशेषाधिकार का हनन और अवमानना का गंभीर मामला है। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 222 के तहत बिरला को दिए नोटिस में यह आग्रह भी किया कि संसद की गरिमा और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाया जाए, ताकि इस तरह के उल्लंघन को न दोहराया जा सके।
लोकसभा सदस्य वेणुगोपाल ने दावा किया कि बीते 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित नहीं होने के बाद 18 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया था और 29 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की और विपक्ष के सदस्यों के मतदान के तरीके का प्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया और इसमें निहित उद्देश्यों को जोड़ दिया।
पीएम का काम स्थापित परंपरा के खिलाफ
उनके मुताबिक, यह एक स्थापित परंपरा है कि संसद सदस्यों द्वारा संसद में दिए गए भाषणों के संबंध में सदन के बाहर उन पर बात करना, आक्षेप लगाना, उद्देश्यों को लेकर दोषारोपण करना विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना है। कांग्रेस नेता ने कहा, ''मौजूदा मामले में यानी 16 और 17 अप्रैल, 2026 को विपक्षी दलों के संसद सदस्य अपनी वास्तविक चिंताएं व्यक्त कर रहे थे। इसके तहत उन्होंने उक्त संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ संसद में अपना वोट डाला।''
पीएम का संबोधन विशेषाधिकार का हनन: कांग्रेस
वेणुगोपाल ने कहा, ''सबसे पहले देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय चिंता के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री के ऐसे संबोधन बहुत कम होते हैं। सरकार द्वारा संसद में अपेक्षित बहुमत न जुटा पाने और विपक्षी दलों की आलोचना करने पर प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को संबोधित करना अभूतपूर्व है जो अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग है। देश के प्रधानमंत्री का इस तरह का बयान देना सदन के विशेषाधिकार का हनन और अवमानना का गंभीर मामला है।''
प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू करें
उन्होंने कहा, ''मैं विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस आपको (माननीय अध्यक्ष को) सौंपता हूं, ताकि इस गंभीर घटना और जानबूझकर किए गए विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का संज्ञान लिया जा सके तथा मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सके ताकि प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की जा सके।''
मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए
वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने को लेकर सवाल उठाया जाना न केवल एक व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।'' उन्होंने आग्रह किया, ''आप (बिरला) संसद की गरिमा और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि इस तरह के उल्लंघनों को न दोहराया जाए।''
प्रधानमंत्री ने पक्षपातपूर्ण ढंग से बात की
वेणुगोपाल के पत्र को टैग करते हुए, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ''मेरे वरिष्ठ सहयोगी, केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में प्रधानमंत्री के नापाक मंसूबों के नाकाम होने के बाद राष्ट्र के नाम उनके तथाकथित संबोधन के लिए प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। एक मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन हमेशा राष्ट्रीय एकता और विश्वास निर्माण के सर्वोपरि उद्देश्य के लिए समर्पित होता है।'' रमेश ने कहा, ''इस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पक्षपातपूर्ण ढंग से बात की, कांग्रेस पार्टी पर 59 अलग-अलग बार नाम लेकर हमले किए। यह प्रधानमंत्री के रूप में उनके रिकॉर्ड पर एक और स्थायी दाग होगा।''
राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने बीते शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को चेताया था कि लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण संबंधी संशोधन का विरोध करके उसने जो ''भ्रूण हत्या का पाप'' किया है, उसके लिए भारत की महिलाएं उन्हें सजा जरूर देंगी। मोदी ने महिलाओं से माफी मांगी थी और कहा था कि सरकार भले ही विधेयक पारित न करा पाई हो लेकिन वह महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को कभी नहीं छोड़ेगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


