खाली हाथ दिल्ली नहीं आ रहे हैं जिनपिंग, 7 साल बाद PM मोदी संग बैठक, भारत को देंगे खास तोहफा
दिल्ली में इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं। इस दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। जिनपिंग अपने साथ तोहफा भी ला रहे हैं।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिक्स समिट के पहले दिन दोनों नेता आपसी बैठक करेंगे और इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। बता दें कि 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह दोनों शीर्ष नेताओं के बीच पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत होगी। खास बात यह है कि जिनपिंग खाली हाथ भारत नहीं आ रहे हैं। उनके दौरे पर दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति को लेकर भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय समझाैते के आसार हैं।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर की शाम को द्विपक्षीय वार्ता होगी। वहीं 11 सितंबर को पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता होगी। इससे पहले जून 2020 में पूर्वी लद्दाख में LAC पर चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। वहीं चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। घटना के बाद LAC पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा और दोनों देशों के संबंधों में भी गिरावट आई। हालांकि अब दोनों देशों ने एक दूसरे को अपना साझेदार मानते हुए रिश्तों को सामान्य बनाने की कई कोशिशें की हैं।
तोहफा ला रहे हैं जिनपिंग
गौरतलब है कि पूर्व में चीन के साथ हुई बातचीत में वह भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का भरोसा दिला चुका है। अब सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
भारत तीसरे स्थान पर
इससे पहले भारत में दुनिया के करीब छह फीसदी दुर्लभ खनिज होने का अनुमान है। इस मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। हालांकि अभी तक इनका पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है। कुछ समय पहले भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू किया है, जिसका मकसद ऐसे दुलर्भ खनिजों की खोजना है। सरकार ने बताया था कि भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र में 7.23 मिलियन टन दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी का पता लगाया है।
क्या है दुर्लभ खनिज?
दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 तत्व हैं, जिनमें से सात चीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इनमें स्कैडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टेरबियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेनियम शामिल हैं। दुनिया में इन दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता का करीब 80 फीसदी हिस्सा अकेले चीन में है। ऐसे में कई देश इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर हैं। यदि भारत के साथ यह समझौता होता है तो भारत को भी इन खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
रूस सहयोग को तैयार
इस बीच, रूस ने भी कहा है कि वह भारत को दुर्लभ खनिजों की खोज में मदद करने के लिए तैयार है। यह एक बेहद जटिल कार्य है और रूस की कंपनियों के पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस संबंध में भारत को सहयोग देने के लिए तैयार है। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है।


