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सरकार के दबाव में काम करना ठीक नहीं, कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

सरकार के दबाव में काम करना ठीक नहीं, कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

संक्षेप:

कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा है कि वह अपने पद के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए निष्पक्षता का व्यवहार करें। सांसदों ने पत्र में कहा कि सस्ता पक्ष के दबाव में आने की जरूरत नहीं है।

Feb 09, 2026 02:49 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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कांग्रेस की महिला सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के निरंतर दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए उन्होंने यह पत्र उस वक्त लिखा है जब बिरला ने बीते गुरुवार को कहा था कि इससे एक दिन पहले कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में नहीं आए।

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इस पत्र पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, सांसद वर्षा गायकवाड़, ज्योति मणि और कुछ अन्य महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस की महिला सांसदों ने पत्र में लिखा, "हम यह पत्र गहरे दुःख और संवैधानिक दायित्व की भावना के साथ लिख रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको, लोकसभा के माननीय अध्यक्ष और इस सदन के संवैधानिक संरक्षक के रूप में सत्तारूढ़ दल द्वारा विपक्ष की महिला सांसदों विशेषकर कांग्रेस की सांसदों के विरुद्ध झूठे, निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया।"

आवाज उठाने के लिए बनाया जा रहा निशाना

उन्होंने कहा, "हमें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हमने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनविरोधी सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाई है और उनसे जवाबदेही की मांग की है। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति किसी भय के कारण नहीं थी, वह सिर्फ इस डर के कारण सदन में नहीं आए कि उनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं था।"

राहुल गांधी को नहीं बोलने दिया गया- कांग्रेस सांसद

उन्होंने कहा, "अध्यक्ष का पद एक संवैधानिक दायित्व वाला है जिसका उद्देश्य संसद की गरिमा बनाए रखना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है, चाहे वे किसी भी दल से हों। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्थापित संसदीय परंपरा यह है कि पहले सत्ता पक्ष और फिर विपक्ष को बोलने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद प्रधानमंत्री उत्तर देते हैं।" उनके मुताबिक, पिछले सप्ताह लगातार चार दिनों तक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

कांग्रेस की महिला सांसदों ने दावा किया, "दूसरी ओर, विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के आठ सांसदों को सत्तारूढ़ दल के कहने पर निलंबित किया गया और एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अभद्र भाषा में बोलने की अनुमति दी गई।" उन्होंने कहा, "जब हम आपसे मिले, तो हमने न्याय की मांग की और उन भाजपा सांसद के निलंबन की मांग की। आपने स्वयं स्वीकार किया कि एक गंभीर गलती हुई है और हमें शाम चार बजे फिर आने को कहा। दोबारा मिलने पर आपने कहा कि आप सरकार की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब आप इन मामलों में निर्णयकर्ता नहीं हैं।"

बिरला के अधिकारों पर उठाए सवाल

महिला सदस्यों ने दावा किया कि इससे अध्यक्ष के रूप में बिरला की स्वतंत्रता और अधिकार पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा, गुरुवार को शाम 5 बजे, परंपरा प्रक्रिया के विरुद्ध, प्रधानमंत्री का लोकसभा में बोलना निर्धारित किया गया। 'इंडिया' गठबंधन के सभी सदस्यों ने विरोध में खड़े होकर आपत्ति जताई और प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए।" उन्होंने दावा किया, "अगले दिन, स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ दल के दबाव में आकर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करते हुए आपने कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए।"

उनका कहना है, "हमारे विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और मर्यादित रहे हैं। हममें से अधिकतर साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और कई पहली पीढ़ी की नेता हैं। हमने दशकों तक जनता के बीच संघर्ष करते हुए, भेदभाव और बाधाओं का सामना करते हुए अपना स्थान बनाया है। हमारी ईमानदारी पर प्रश्न उठाना हर उस महिला का अपमान है जो साहस और गरिमा के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाती है।" कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा, "हम हिंसा और धमकी की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। हम साहसी निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं जिन्हें डराकर चुप नहीं कराया जा सकता। हमें विश्वास है कि पारदर्शिता ही अध्यक्ष के पद की गरिमा और इस सदन की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित कर सकती है।"

उन्होंने बिरला से कहा, "हमें आपके पद और आपके प्रति पूर्ण सम्मान है। किंतु यह स्पष्ट है कि आप पर सत्तारूढ़ दल का लगातार दबाव है। हम आपसे पुनः आग्रह करते हैं कि आप लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करें। इस प्रयास में हम आपके साथ खड़े रहेंगे और आपको पूरा समर्थन देंगे।"उन्होंने इस बात पर जोर दिया, "इतिहास आपको उस व्यक्ति के रूप में याद रखे जो कठिन परिस्थितियों में भी सही के साथ खड़ा रहा और देश के हित में संवैधानिक मर्यादा की रक्षा की। आपको ऐसे व्यक्ति के रूप में याद न किया जाए जो उन लोगों के दबाव में झुक गया जिन्होंने लोकतंत्र की आत्मा को नुकसान पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।"

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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