
कार्यकर्ताओं का विद्रोह या नया टेंशन? दो दिनों में दो बार एक-दूसरे के घर क्यों पहुंचे ठाकरे ब्रदर्स
20 सालों बाद दोनों ठाकरे बंधु एक हुए हैं। BMC की कुल 227 सीटों में से 163 सीटों पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना चुनाव लड़ रही है, जबकि राज ठाकरे की पार्टी को 53 सीटें आवंटित की गई हैं और शरद पवार की NCP को 11 सीटें दी गई हैं।
ीशिवसेना (UBT) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने आज (गुरुवार, 1 जनवरी को) अपने चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे से मुलाकात कर 15 जनवरी को होने वाले BMC समेत अन्य महानगरपालिका चुनावों के घोषणापत्र और अभियान को लेकर चर्चा की। उद्धव ने राज से उनके आवास ‘शिवतीर्थ’ पर मुलाकात की। दो दिन पहले, MNS प्रमुख राज ठाकरे उद्धव के आवास ‘मातोश्री’ गए थे। दो दिनों में दोनों भाइयों के एक-दूसरे के घर पर जाकर की गई यह दूसरी मीटिंग है।
ऐसा माना जा रहा है कि उद्धव और राज ने दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे विद्रोह का मुकाबला करने की रणनीति पर भी चर्चा की, क्योंकि प्रत्येक महानगरपालिका वार्ड के लिए कई दावेदार थे जिन्होंने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ विद्रोह कर दिया है। दोनों दलों के प्रमुख मुंबई महानगर क्षेत्र में संयुक्त रैलियों को संबोधित करेंगे।
दोनों के बेटे दे रहे चुनावी घोषणापत्र को अंतिम रूप
इससे पहले दिन में, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि उद्धव और राज के बेटे, क्रमशः महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे, चुनाव घोषणापत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं। राउत ने बताया कि उद्धव और राज ठाकरे मुंबई में तीन, कल्याण-डोम्बिवली में दो-दो और ठाणे, मीरा-भयंदर और नासिक में एक-एक रैलियों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे। महाराष्ट्र में मुंबई समेत 29 महानगरपालिकाओं के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा जबकि मतगणना 16 जनवरी को होगी।
यह चुनाव मुंबई की पहचान को बचाने का
दूसरी तरफ, राज ठाकरे ने नगर निगम चुनावों के लिए चयनित पार्टी उम्मीदवारों से गुरुवार को अपील की कि वे मुंबई को बचाने के लिए पूरी कोशिश करें। उन्होंने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव लड़ रहे पार्टी उम्मीदवारों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, "यह चुनाव मुंबई की पहचान को बचाने का एक महत्वपूर्ण और शायद आखिरी मौका है। यह शहर मराठी लोगों का है और ऐसा ही रहना चाहिए।" उन्होंने उम्मीदवारों से अटूट दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की अपील की और चुनाव के दौरान प्रलोभनों के खिलाफ उम्मीदवारों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें पैसे सहित कई तरह के प्रलोभन दिए जाएंगे, लेकिन उन्हें इन झांसों में नहीं आना चाहिए।

किसी भी हालत में फर्जी वोटिंग न होने दें
उन्होंने कहा, "दृढ़ रहें, मुझे भी कई लालच दिए गए थे, लेकिन मैंने उन्हें दूर भगा दिया।" फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए सख्त निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में फर्जी वोटिंग न होने दें और बहुत सतर्क रहें तथा हर बूथ पर कम से कम दस मनसे कार्यकर्ता तैनात करें। उन्होंने कहा कि अगर कोई फर्जी वोटिंग करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे तुरंत मौके पर ही रोक दिया जाना चाहिए।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




