महिला आरक्षण के साथ होगा कौन सा पहला चुनाव, फिर कहां-कहां लागू करने की तैयारी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम से परिसीमन और जनगणना की शर्त हटने जा रही है। जानिए 50% सीटें बढ़ने का नया फॉर्मूला, 816 सीटों वाली नई लोकसभा का गणित और 33% कोटे के साथ होने वाला पहला चुनाव (2027 या 2029)। पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें।

Lok Sabha

केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' यानी महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पहले इसे नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था, लेकिन अब सरकार इस शर्त को हटाकर इसे जल्द लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा बजट सत्र में ही दो नए संशोधन विधेयक लाए जाने की योजना है।

महिला आरक्षण के साथ कौन सा होगा पहला चुनाव?

मुख्य लक्ष्य - 2029 लोकसभा चुनाव: सरकार का आधिकारिक और प्राथमिक लक्ष्य मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में इसे पूर्ण रूप से लागू करना है। इसका मतलब है कि 2029 का लोकसभा चुनाव पहला ऐसा आम चुनाव होगा जहां महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी यह एक साथ लागू होगा।

संभावित अर्ली रोलआउट - 2027 विधानसभा चुनाव: यदि संसद से दोनों संशोधन विधेयक बिना किसी अड़चन के पास हो जाते हैं, तो सरकार इसे 2029 से पहले ही टेस्ट कर सकती है। ऐसे में 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनाव पहले ऐसे चुनाव बन सकते हैं जहां महिला आरक्षण का फॉर्मूला जमीन पर लागू किया जाएगा। हालांकि इसकी संभावना बेहद कम लग रही है।

कैसे लागू होगा आरक्षण? (नया फॉर्मूला)

बिना नई जनगणना का इंतजार किए आरक्षण लागू करने के लिए सरकार ने एक नया फॉर्मूला तैयार किया है।

सीटों में 50% का इजाफा: लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों में 50% की वृद्धि की जाएगी। इससे लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी।

महिलाओं के लिए 273 सीटें: बढ़ी हुई सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 273 सीटें सीधे तौर पर आरक्षित होंगी। (सदन में बहुमत का आंकड़ा भी अब 272 से बढ़कर 409 हो जाएगा)।

राज्यों में आनुपातिक वृद्धि: इसी तरह सभी राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या 50% बढ़ाई जाएगी (जैसे यूपी की लोकसभा सीटें 80 से 120 और बिहार में 40 से 60 हो जाएंगी)। यह कदम उन दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को भी दूर करेगा जिन्हें जनसंख्या नियंत्रण के कारण अपनी राजनीतिक शक्ति कम होने का डर था।

लॉटरी सिस्टम: आरक्षित सीटों का चुनाव करने के लिए 2011 की जनगणना को ही आधार माना जा सकता है और सीटों के आवंटन के लिए 'लॉटरी आधारित सिस्टम' का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण भी इसी के तहत लागू रहेगा।

आगे कहां-कहां और कैसे लागू करने की तैयारी है?

लोकसभा और विधानसभाएं: बिल पास होने के बाद, इसका प्रभाव सीधे तौर पर पूरे देश की लोकसभा और राज्य विधानसभाओं (दिल्ली सहित) पर पड़ेगा। हर जगह 33% कोटा महिलाओं के लिए फिक्स होगा।

सीटों का रोटेशन: जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में केवल 1 या 2 लोकसभा सीटें हैं, वहां हर तीसरे चुनाव में सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। अन्य बड़ी जगहों पर आरक्षित सीटें तीन कार्यकाल (15 साल) तक महिलाओं के लिए रिजर्व रहेंगी और फिर उन्हें ओपन कैटेगरी (अनारक्षित) में डाला जाएगा।

राज्यसभा और विधान परिषद: यह स्पष्ट किया गया है कि राज्यसभा (उच्च सदन) और राज्यों की विधान परिषदों की सदस्य संख्या और स्वरूप पर इस नए परिसीमन या महिला आरक्षण का कोई असर नहीं पड़ेगा।

अमित शाह ने संभाला मोर्चा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए एनडीए (NDA) और गैर-एनडीए (विपक्षी) दलों के नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। कांग्रेस, टीएमसी जैसे दल लंबे समय से जनगणना की शर्त हटाने की मांग कर रहे थे, इसलिए सरकार को विपक्ष का समर्थन मिलने की उम्मीद है। 28-29 मार्च के आसपास संसद में इसे लेकर बिल पेश किया जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि 4 अप्रैल को बजट सत्र के खत्म होने से पहले इसे पास करा लिया जाए। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो मौजूदा बजट संसद सत्र को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

परिसीमन या सीमा आयोग एक 'निष्पक्ष' निकाय है जिसे लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इसके निर्णयों को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि एक निष्पक्ष निकाय परिसीमन प्रक्रिया में विश्वास पैदा करेगा। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन उसे अखिल भारतीय परिसीमन प्रक्रिया संचालित करने का दायित्व नहीं दिया जा सकता। एक सरकारी पदाधिकारी ने बताया कि अधिक से अधिक, यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में परिसीमन किया था।

सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है। सूत्रों ने बताया कि यह अधिनियम अबतक लागू नहीं हुआ है, फिर भी सरकार की इच्छा होने पर और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन मिलने पर संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है।

(इनपुट एजेंसी)

Amit Kumar

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