इसकी सैलरी से 25000 निकालो, पत्नी के खाते में डालो; गुजारा नहीं दे रहे पति की कंपनी से बोला सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने इससे पहले दोनों को शादी खत्म करने के लिए रकम की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा था। अंतरिम राहत के तौर पर पति को 25 हजार रुपये पत्नी को देने के आदेश दिए गए थे। ये रकम मध्यस्थता प्रक्रिया में महिला और उनके बच्चे आने-जाने के खर्च के लिए थी।

आदेशों के बाद भी पत्नी और बच्ची को गुजारा नहीं दे रहे व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। खबर है कि अदालत ने व्यक्ति के एम्पलॉयर को ही उसकी सैलरी काटने और सीधे महिला के खाते में रकम डालने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष न्यायालय ने पाया कि कपल करीब 4 सालों से अलग रह रहा है और पत्नी अकेली ही बच्चे का भरण पोषण कर रही है।
बच्ची से मिलने तक नहीं आया पिता
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। लाइव लॉ के अनुसार, अदालत ने पाया कि व्यक्ति ने पूर्व में जारी आदेशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया है कि 4 साल की बच्ची का ध्यान महिला ही अकेली रख रही है। इतना ही नहीं बच्ची का पति बीते चार सालों से उससे मिलने तक नहीं आया है।
कोर्ट की कोई बात नहीं मानी
रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने इससे पहले दोनों को शादी खत्म करने के लिए रकम की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा था। अंतरिम राहत के तौर पर पति को 25 हजार रुपये पत्नी को देने के आदेश दिए गए थे। ये रकम मध्यस्थता प्रक्रिया में महिला और उनके बच्चे आने-जाने के खर्च के लिए थी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ।
बेंच को सूचित किया गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट की तरफ से जारी एक अंतरिम आदेश 2024 में जारी किया गया था। साथ ही बताया गया कि पति पर करीब 1.38 लाख रुपये का बकाया हो गया था।
पति ने किया परेशानी का दावा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पति की तरफ से दिए गए हलफनामे की भी जांच की, जिसमें उसने सैलरी 50 हजार रुपये बताई थी। साथ ही कहा था कि वह आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है। जज ने उससे पूछा कि क्या वह 2.5 लाख रुपये जमा कराना चाहता है, जिसमें अंतरिम गुजारे का एरियर भी शामिल है। इसपर उसने भुगतान से इनकार कर दिया।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने कहा, 'ऐसी परिस्थितियों में, हमारे पास प्रतिवादी-पति के नियोक्ता को यह निर्देश देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है कि पति के वेतन से 25,000 रुपये प्रति माह काटे जाएं। यह राशि सीधे RTGS के माध्यम से उसकी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।' बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि वह खासतौर से बच्चे की चिंता है। कोर्ट ने पाया कि महिला अपने रिश्तेदार के पास रहकर बच्ची को खुद ही पाल रही हैं।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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