मुस्लिम सांसदों ने भाजपा से बनाई दूरी, यूसुफ पठान भी नहीं होंगे शामिल
यूसुफ पठान भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं होंगे। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में जाने वाले एक बागी सांसद ने ऐसा दावा किया है। वहीं, अटकलें हैं कि कुल 17 सांसद भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उथल पुथल के आसार हैं। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा कर दिया है कि NCPI यानी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर चुके 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही यूसुफ पठान, सायोनी घोष समेत कई नेताओं को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, बागी धड़े ने साफ कर दिया है कि ऐसी कोई योजना नहीं है।
बासुनिया ने दावा कर दिया है कि 17 सांसद भारतीय जनता पार्टी में जाने की तैयारी कर रहे हैं और इसे अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने अटकलों को हवा दे दी है कि दुर्गा पूजा के बाद दल बदल हो सकता है। खास बात है कि टीएमसी से 20 सांसद अलग होकर NCPI में आए थे और NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस को समर्थन दिया था।
यूसुफ पठान भी बदलेंगे पार्टी
बागी गुट में शामिल नेता अबू ताहेर खान ने बासुनिया के इन दावों पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही कहा है कि उन्हें गुट की तरफ से बोलने का कोई हक नहीं है। खान ने कहा है, 'हम भाजपा में नहीं जाएंगे। हम NDA में नहीं जाएंगे। यह स्पष्ट है।' इनमें उन्होंने जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान और बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान का भी नाम लिया है। उन्होंने कहा है कि तीनों बाहर से एनडीए को समर्थन देंगे।
साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि तीनों नेता भाजपा या एनडीए की बैठकों में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तरफ से विकास के मुद्दे पर बुलाई गईं बैठकों में शामिल होने पर सहमति दी है।
सायोनी घोष का क्या
बासुनिया की तरफ से किए गए 17 सांसदों के दावों में नेताओं का नाम नहीं बताया गया था। ऐसे में साफ नहीं हो पाया है कि इनमें सायोनी घोष भी हैं या नहीं। हालांकि, कुल 20 सांसदों ने बगावत की थी और 3 सांसद बाहर से एनडीए को समर्थन देने और भाजपा में नहीं जाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि बासुनिया के दावे के अनुसार, अगर दल बदल होता है, तो घोष उसमें शामिल हो सकती हैं।
खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब राज्य में कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम जैसे चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य में पहली बार चुनाव हो रहे हैं। भाजपा साफ कर चुकी है कि वह अपने दम पर अकेले ही इन चुनावों में उतरेगी।
भाजपा बागियों को लेगी क्या
इधर, भाजपा ने किसी को भी पार्टी में तुरंत लेने की योजना से तत्काल इनकार कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, ‘जहां तक मेरी जानकारी है, तृणमूल या एनसीपीआई से कोई भी भाजपा में शामिल नहीं हो रहा है। राज्य के लोग यह नहीं भूले हैं कि तृणमूल शासन के दौरान इन नेताओं और सांसदों ने किस तरह के अत्याचार किए थे।’
चुनाव चिह्न और नाम पर भी संकट
खबरें ये भी हैं कि आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनाव से पहले टीएमसी नेतृत्व पर भी फैसला आ सकता है। पार्टी सांसदों के अलावा विधायक स्तर पर भी टूटी है और ऋताब्रत बनर्जी गुट के साथ 60 से ज्यादा विधायक होने का दावा किया जा रहा है। पार्टी ने नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।


