अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर चलेगा बुलडोजर? कितने घर रडार पर, मिला अल्टीमेटम
निगम अधिकारी ने अखबार से कहा कि अधिकारी ने बताया कि सुनवाई के बाद स्पेशल ऑफिसर के पास दो रास्ते होते हैं। वे या तो बिना अनुमति के बने अवैध हिस्से को तोड़ने का आदेश दे सकते हैं, या फिर भारी जुर्माना लगाकर उस निर्माण को कानूनी रूप से सही मान सकते हैं।

लोकसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों को ढहाने की कार्रवाई हो सकती है। खबर है कि KMC यानी कोलकाता नगर निगम ने उन्हें एक दर्जन से ज्यादा संपत्तियों के संबंध में नोटिस भेजे हैं और दस्तावेज पेश करने के लिए कहा है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी कहा था कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों से तृणमूल कांग्रेस नेताओं की संपत्तियों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं।
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि केएमसी ने अभिषेक की 17 संपत्तियों के अवैध हिस्सों के संबंध में नोटिस भेजा है। इस नोटिस में इमारतों के स्केच, लिफ्ट या एस्केलेटर्स की जानकारी भी मांगी गई है। अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि टीएमसी नेता के पास नोटिस को चुनौती देने के भी विकल्प हैं। साथ ही उन्हें यह बताना पड़ेगा कि अवैध हिस्से क्यों नहीं ढहाए जाने चाहिए।
नोटिस में क्या
रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस में कहा गया है कि कोलकाता नगर निगम (KMC) अधिनियम, 1980 की धारा 400(1) के तहत आपको आदेश दिया जाता है कि इस इमारत के जितने हिस्से का निर्माण बिना अनुमति या नियमों के खिलाफ जाकर किया गया है, उसे 7 दिनों के भीतर गिरा दें। साथ ही कहा गया है कि इसी तरह के नोटिस 17 संपत्तियों के संबंध में दिए गए हैं।
ये भी हैं विकल्प
KMC के सूत्रों ने अखबार को बताया कि धारा 400(1) के तहत मकान मालिकों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलता है। अगर किसी के निर्माण को अवैध माना भी गया है, तो भी वह अधिकारियों के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख सकता है। इस तरह के मामलों की सुनवाई कोलकाता नगर निगम के मुख्यालय में होती है, जहां स्पेशल ऑफिसर दोनों पक्षों की बात सुनते हैं।
निगम अधिकारी ने अखबार से कहा कि अधिकारी ने बताया कि सुनवाई के बाद स्पेशल ऑफिसर के पास दो रास्ते होते हैं। वे या तो बिना अनुमति के बने अवैध हिस्से को तोड़ने का आदेश दे सकते हैं, या फिर भारी जुर्माना लगाकर उस निर्माण को कानूनी रूप से सही मान सकते हैं।
ये संपत्तिया रडार पर
अवैध निर्माण वाली ज्यादातर प्रॉपर्टीज रहने के मकान हैं, जो कालीघाट, गरियाहाट के पास, पंडिटिया और कुछ अन्य इलाकों में स्थित हैं। इनमें से कुछ इमारतों के मालिक खुद अभिषेक हैं या फिर उनके करीबी लोग और कंपनियां हैं। वहीं कुछ मामलों में, बड़े अपार्टमेंट्स के फ्लैट्स का कनेक्शन अभिषेक या उनके करीबियों से जुड़ा हुआ है।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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