फिर होगा शुभेंदु अधिकारी vs ममता बनर्जी? CM के गढ़ भवानीपुर में भाजपा ऐक्टिव; SIR में घटे वोटर
दक्षिण कोलकाता के एक भाजपा नेता ने कहा कि वार्ड 70 को वॉर रूम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि हाल के चुनावों में पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिले थे। उन्होंने कहा, 'सभी चुनावी डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच संकेत मिल रहे हैं कि 2021 की तरह 2026 में भी राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बनाम भारतीय जनता पार्टी विधायक शुभेंदु अधिकारी देखने को मिल सकता है। इस बार सीएम बनर्जी का गढ़ भवानीपुर मैदान बन सकता है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन भाजपा की तैयारियां इस ओर इशारा कर रहीं हैं।
भाजपा ने बनाया वॉर रूम
अधिकारी ने पार्टी के अभियान का नेतृत्व करने के लिए इस निर्वाचन क्षेत्र में समर्पित वॉर रूम स्थापित किया है। खास बात है कि बनर्जी का घर कालीघाट में स्थित है, जो दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। एजेंसी वार्ता ने स्थानीय भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया है कि कोलकाता नगर निगम के तहत वार्ड 70 में एक घर के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित यह कार्यालय विधानसभा क्षेत्र में चुनावी रणनीति और बूथ-स्तरीय प्रबंधन का काम करेगा। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में केएमसी के आठ वार्ड 63, 70, 71, 72, 73, 74, 77 और 82 शामिल हैं।
भाजपा नेताओं का दावा किया है कि 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से पार्टी ने इस क्षेत्र में कम से कम छह वार्डों में लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। कई मामलों में केसरिया खेमे ने वार्ड 63, 70, 71, 72 और 74 में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया। अधिकारी सप्ताह में कम से कम एक बार संगठनात्मक बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भवानीपुर का दौरा कर रहे हैं।
भवानीपुर में सुधरा है भाजपा का ग्राफ
दक्षिण कोलकाता के एक भाजपा नेता ने कहा कि वार्ड 70 को वॉर रूम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि हाल के चुनावों में पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिले थे। उन्होंने कहा, 'सभी चुनावी डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया है। हम ज्यादा से ज्यागा एकता पक्का करने के लिए बूथ-वाइज रणनीति बना रहे हैं।' उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में बदलाव से वार्ड 77 समेत कुछ इलाकों में समीकरण भी बदल गए हैं।
भवानीपुर के एक भाजपा नेता ने दावा किया कि इस चुनाव क्षेत्र में तृणमूल की जीत अक्सर वार्ड 77 से बड़े अंतर पर निर्भर करती थी, जो अल्पसंख्यकों का दबदबा वाला इलाका है। उन्होंने कहा, 'एसआईआर में कई संदिग्ध नाम हटाए जाने और पांच से छह वार्डों में हमारे वोट एक हो जाने से, परिदृश्य बदल रहा है। जब समय आएगा, तो लोग देखेंगे कि हमने कितनी कड़ी लड़ाई लड़ी है।'
2021 का चुनाव
भाजपा नेताओं का मानना है कि बनर्जी ने 2021 का विधानसभा चुनाव नंदीग्राम से लड़ा था और अधिकारी से हार गई थीं। उन्हें करीब 2 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा था। वह 2026 में भवानीपुर लौट सकती हैं। नंदीग्राम में अपनी हार के बाद उन्होंने उसी वर्ष बाद में संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए कि उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव जीता था। हालांकि, टीएमसी ने राज्य में जीतने में सफलता हासिल की थी।
घर-घर कार्यक्रम जारी
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने शुक्रवार को कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में घर-घर संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। मजूमदार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए दीवारों पर भित्तिचित्र बनाने में भी भाग लिया। उन्होंने दावा किया, 'यदि ममता बनर्जी भवानीपुर से दोबारा चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं तो वह चुनाव हार जाएंगी।'
SIR में कितने नाम कटे
फरवरी के अंत में जारी मतदाता सूची से पता चला है कि भवानीपुर से 47,000 से अधिक नाम हटाए गए हैं और 14,000 से अधिक नामों को 'विचाराधीन' माना में रखा गया। पिछले साल चार नवंबर को एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने पर भवानीपुर में 2,06,295 मतदाता थे। पिछले साल 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा सूची में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 44,786 नामों को हटाए जाने की जानकारी दी गई थी।
शनिवार को जारी अंतिम सूची में 2,324 और नाम हटा दिए गए, जिससे हटाए गए नामों की कुल संख्या 47,094 हो गई। यह संख्या 2021 के भवानीपुर उपचुनाव में बनर्जी द्वारा हासिल किए गए 58,000 से अधिक वोटों के अंतर से लगभग 11,000 कम है।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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