डिलिमिटेशन बिल पर कांग्रेस संग स्टालिन की DMK ने कर दिया 'खेल'? कैसे पास हो सकता है विधेयक
सूत्रों के अनुसार, डीएमके चाहती है कि बिल में हर राज्य में 50 फीसदी सीटों की बढ़ोतरी वाला प्रावधान को जोड़ा जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह बात पिछली बार जब बिल पेश हुआ था, तब कह भी चुके हैं।

गठबंधन टूटते ही एमके स्टालिन की डीमएके ने कांग्रेस के साथ खेल कर दिया है। दरअसल, अटकलें हैं कि संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर से डिलिमिटेशन बिल ला सकती है। हालांकि, अभी तक ऑफिशियली लिस्ट नहीं किया गया है। बिल पास करवाने के लिए जरूरी दो-तिहाई की संख्या जुटाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पिछली बार विरोध में रहने वाली डीएमके इस बार इसका समर्थन कर सकती है। इनसाइड स्टोरी के अनुसार, रविवार को हुई ऑल पार्टी मीटिंग पर रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद प्रेमचंद्रन का कहना है कि डीएमके इस बिल के सपोर्ट के लिए राजी हो गई है, लेकिन दूसरी ओर डीएमके सांसद तिरुचि शिवा का कहना है कि सरकार ने अभी तक कोई साफ प्रस्ताव नहीं दिया है।
सरकार ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में डिलिमिटेशन बिल पेश किया था, लेकिन जब वह पास नहीं हो सका था। अब टीएमसी और शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट होने के बाद संख्या दो तिहाई के करीब पहुंचने लगी है। माना जा रहा है कि डीएमके भी इसका सपोर्ट कर सकती है। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने 'CNN-न्यूज 18' से बताया, ''सरकार डिलिमिटेशन के लिए कोई साफ प्रस्ताव नहीं लाई है। दक्षिण राज्यों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। महिला आरक्षण बिल को मौजूदा संख्या के साथ तुरंत लागू करना चाहिए। डिलिमिटेशन पर हम सरकार से ज्यादा स्पष्टता चाहते हैं।''
सूत्रों के अनुसार, डीएमके चाहती है कि बिल में हर राज्य में 50 फीसदी सीटों की बढ़ोतरी वाला प्रावधान को जोड़ा जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह बात पिछली बार जब बिल पेश हुआ था, तब कह भी चुके हैं। सूत्रों ने कहा, ''अगर बिल में यह मेंशन होता है तो वे (डीएमके) पॉजिटिव तरीके से विचार करने के लिए तैयार हैं।''
हालांकि, सरकार ने मॉनसून सत्र में इसे दोबारा पेश करने के लिए लिस्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार जरूरी संख्या जुटा लेगी। डीएमके के तेवर में बदलाव तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से आया है। दरअसल, कई दशकों पुराना कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन विजय की पार्टी टीवीके के सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद टूट गया। कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया, जिसके बाद टीवीके सरकार बन सकी। इससे डीएमके काफी नाराज हो गई और उसने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाया।
डीएमके के सपोर्ट से कैसे पास हो सकता है बिल?
डीलिमिटेशन बिल संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया से गुजरेगा, जिसकी वजह से इसे पास करने के लिए दो तिहाई संख्या की जरूरत होगी। इस बिल के पक्ष में पिछली बार 298 सांसदों ने वोट किया था। मई में बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के 20 सांसद ममता बनर्जी के गुट से टूट गए और एनसीपीआई में विलय कर लिए, जिससे यह संख्या बढ़कर 318 पहुंच गई। इसके अलावा, शिवसेना यूबीटी के छह सांसद शिवसेना शिंदे गुट में चले गए। इससे संख्या बढ़कर 324 हो गई है। अब डीएमके का रुख काफी अहम माना जा रहा है। डीएमके के पास इस समय 22 सांसद हैं। दो तिहाई के लिए लगभग 360 सांसदों की जरूरत होगी। अगर डीएमके तैयार हो जाती है तो संख्या बढ़कर 346 हो जाएगी। वहीं, सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की एनसीपी एसपी भी एनडीए में शामिल हो सकती है। एनसीपी एसपी के पास आठ सांसद हैं। इससे कुल संख्या बढ़कर 354 हो सकती है। वहीं, कुछ सांसद या छोटी पार्टियां गैर हाजिर रहकर जरूरी दो तिहाई के आंकड़े को कम कर सकती है, जिससे यह बिल पास हो सकता है। ऐसे में डीएमके का बिल को सपोर्ट करना बहुत जरूरी है।
लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।
विशेषज्ञता
देश-विदेश की राजनीति पर गहरी पकड़
यूपी-बिहार समेत सभी राज्यों की खबरों को कवर करने का व्यापक अनुभव
विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, संसद की कार्यवाही को लंबे समय से कवर किया
ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज, एनालिसिस स्टोरीज, एशिया, मिडिल ईस्ट, पश्चिमी देशों की खबरों को कवर करने का एक दशक से ज्यादा का एक्सपीरियंस


