राघव चड्ढा की चली जाएगी राज्यसभा की सदस्यता? वोटर लिस्ट से नाम कटने पर उठे सवाल
Raghav Chadha: आप का कहना है कि राघव चड्ढा अब पंजाब के बजाय दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने अपना स्थान बदला है तो अपने वोट का ट्रांसफर कराना उनकी अपनी जिम्मेदारी थी, जिसके लिए वे पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते।

Raghav Chadha: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच गंभीर आरोप लगाए हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम हटने पर राज्य की आप सरकार पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया है। आम आदमी पार्टी ने भी पलटवार किया है। इस सबके बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इसकी वजह से राघव चड्ढा की सांसदी चली जाएगी?
आपको बता दें कि पंजाब में जारी SIR प्रक्रिया के तहत 13 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई। इसमें राघव चड्ढा का नाम 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लीकेट' की श्रेणी में शामिल किया गया है। मतदाता सूची में उनके नाम के आगे स्थायी रूप से ट्रांसफर दर्ज किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत पंजाब के लगभग 20.66 लाख करीब 9.7% मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं।
राघव चड्ढा का AAP पर वार
पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर आप सरकार और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। चड्ढा का आरोप है कि पंजाब सरकार की पुलिस और प्रशासन उन नेताओं को निशाना बना रहा है जिन्होंने आप छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियो के लिए एक संरक्षित सूची का प्रावधान होता है, ताकि दावे और आपत्तियों के दौरान उनका नाम ड्राफ्ट सूची में बना रहे। चड्ढा के अनुसार, उनके मामले में इस नियम का जानबूझकर उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक ड्राफ्ट रोल है और वे चुनाव आयोग के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराकर इसे अंतिम सूची में ठीक करवाएंगे।
आम आदमी पार्टी का पलटवार
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया है। आप प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि SIR का काम चुनाव आयोग का है न कि राज्य सरकार का। सरकार यह तय नहीं करती कि किसका नाम कटेगा या जुड़ेगा। आप ने दावा किया कि उन्हें चुनाव आयोग के सूत्रों से जानकारी मिली है कि राघव चड्ढा दिल्ली के राजेंद्र नगर से बैकडेटेड प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। आप ने मांग की है कि इस गैर-कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आप का कहना है कि यह सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज है कि राघव चड्ढा अब पंजाब के बजाय दिल्ली में रह रहे हैं। अगर उन्होंने अपना स्थान बदला है तो अपने वोट का ट्रांसफर कराना उनकी अपनी जिम्मेदारी थी, जिसके लिए वे पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते।
राज्यसभा सदस्यता पर मंडराता खतरा?
विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि यदि राघव चड्ढा का नाम मतदाता सूची से बाहर रहता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 3 के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए भारत के किसी भी संसदीय क्षेत्र का मतदाता होना अनिवार्य है। 2003 के संशोधन के बाद यह बाध्यता समाप्त कर दी गई थी कि प्रत्याशी को उसी विशिष्ट राज्य का मतदाता होना जरूरी है जहां से वह चुना जा रहा है। फिर भी संसद सदस्य बने रहने के लिए देश में कहीं न कहीं वैध मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य माना जाता है।


