रूठे साथियों को मना पाएंगी ममता? बागियों की बगावत दे सकती है बड़ा मौका, कितना है चांस

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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ममता बनर्जी को छोड़कर गए विधायक फिर से टीएमसी में लौट सकते हैं। बागियों के बीच जिस तरह की बगावत हो रही है, उससे ममता को शुभ संकेत मिल रहे हैं। जानिए ऐसा होने के चांस कितने फीसदी हैं…

रूठे साथियों को मना पाएंगी ममता? बागियों की बगावत दे सकती है बड़ा मौका, कितना है चांस

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी, टीएमसी को लगातार झटके लग रहे हैं। इस आंतरिक टूट से बचने के लिए टीएमसी लगातार जूझ रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी इस राजनीतिक तूफान से उबरने में कामयाब होंगी? क्या ममता का अभी भी अपने संगठन पर पकड़ है या नहीं? हालांकि जिस तरह से बागियों में बगावत की खबरें आ रही हैं, उससे ममता को थोड़ी राहत तो मिली ही होगी। इस बात से अनुमान लगाया जा रहा है कि अभी भी ममता बनर्जी की मान्यता बची हुई है। इस तरह बंगाल की सियासत में ममता का अंत मान लेना, अभी गलत होगा। जिस तरह बागियों में दरार की खबरें आ रही हैं, ममता बनर्जी के पास मौका है कि रूठे हुए साथियों को अपने साथ आने के लिए मना लें।

बागियों में बगावत
ममता बनर्जी से अलग गुट बनाने वाले 58 विधायकों ने कोलकाता में एक बैठक की थी। इस दौरान बैठक की अध्यक्षता ऋतब्रत बनर्जी ने की। ऋतब्रत ही वह विधायक हैं, जो बागियों की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का ओहदा भी हासिल कर लिया है। हालांकि ऋतब्रत के लिए चिंता की बात यह है कि कोलकाता की बैठक में 58 बागियों में से केवल 32 ही पहुंचे। अब इसको लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि बागी विधायक फिर से ममता के पास लौटने के इच्छुक हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इन 58 बागियों में कुछ टूटकर फिर से ममता बनर्जी के साथ जा सकते हैं। बताया जा रहा है इन विधायकों को ऋतब्रत बनर्जी के उस बयान ऐतराज है, जिसमें उन्होंने ममता को सलाहकार के रूप में काम करने के लिए कहा था। इन सभी का कहना है कि ममता ही पार्टी की सुप्रीम लीडर रहेंगी।

अभिषेक बनर्जी पर है गुस्सा
बताया जा रहा है कि टीएमसी के बीच बगावत की वजह ममता नहीं, बल्कि अभिषेक बनर्जी हैं। पार्टी के नेता अभिषेक की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। उनके अंदर ममता के भतीजे को लेकर काफी ज्यादा गुस्सा है। जमीनी कार्यकर्ता और अन्य वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के सेंट्रलाइज मैनेजमेंट और रणनीतिक गलतियों को हालिया चुनावी हार के लिए दोषी ठहराते हैं। चूंकि ममता बनर्जी इस प्रत्यक्ष विरोध से काफी हद तक खुद को अलग रखती हैं, इसलिए भावनात्मक और राजनीतिक पकड़ उनके साथ बनी रहती है। जानकार बताते हैं कि ममता ने पार्टी के लिए खुद काफी संघर्ष किया है। टीएमसी का आम कार्यकर्ता भी इस बात से इत्तेफाक रखता है। ऐसे में वह असंतुष्ट विद्रोहियों को मनाने में काफी हद तक सफल हो सकती हैं।

कानूनी तरीकों पर विचार
इन सबके बीच टीएमसी कानून का रास्ता अख्तियार करने के बारे में भी सोच रही है। ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता देने के निर्णय के खिलाफ कड़ा कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रही है। पार्टी रणनीतिकारों का तर्क है कि यह मान्यता स्थापित संसदीय परंपराओं और वैधानिक मार्गदर्शिकाओं का उल्लंघन करके दी गई है। इस लड़ाई को अदालत तक ले जाकर, ममता बनर्जी का उद्देश्य अलग हुए गुट की राजनीतिक रफ्तार को रोकना, ऋतब्रत बनर्जी के अधिकार को चुनौती देना और अपनी शेष विधायक संख्या को मजबूत करने पर ध्यान देना है। इन सबके बीच, ममता बनर्जी के पास मौका हुआ है कि वह रूठे हुए विधायकों को मनाकर अपने पक्ष में कर लें।

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Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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