कर्नाटक में 56 हजार भर्तियों से पहले आरक्षण में होगा बड़ा बदलाव? कैबिनेट की बैठक तय
कर्नाटक में विभिन्न वर्गों के लिए आंतरिक आरक्षण बढ़ाने की मांग पर सरकार कैबिनेट की मीटिंग करने वाली है। इस मीटिंग में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि सरकार पहले ही अनुसूचित जातियों के लिए आंतरिक आरक्षण देने के लिए सहमत हो गई है

कर्नाटक में 56 हजार पदों पर भर्तियों और आरक्षण का मुद्दा तूल पकड़ चुका है। बीजेपी सिद्धारमैया सरकार को आंदोलन की धमकी दे रही है। इसी बीच कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जातियों के आरक्षण को लेकर बैठक बुलाने का फैसला किया है। हालांकि बैठक की कोई तारीख अभी बताई नहीं गई है। इस बैठक में सरकारी पदों पर होने वाली सीधी भर्ती को लेकर चर्चा होनी है।
आंतरिक आरक्षण पर सहमत सरकार
बीजेपी का कहना है कि अंदरूनी आरक्षण को ध्यान में रखते हुए ये पद भरे जाने चाहिए। सरकार का कहना है कि अनुसूचित जाति आंतरिक आरक्षण ढांचे के अंदर खानाबदोश समुदायों के लिए अलग से एक फीसदी कोटा देने की मांग पर कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि सरकार पहले ही अनुसूचित जातियों के लिए आंतरिक आरक्षण देने के लिए सहमत हो गई है लेकिन अलग-अलग समुदायों के बीच कोटा बांटने के सवाल पर कुछ मुद्दे सामने आए हैं। उन्होंने कहा, "पहले अनुसूचित जाति समुदाय के लिए 17 फीसदी आंतरिक आरक्षण देने का फैसला किया गया था। अब खानाबदोश समुदायों (अलेमारिस) के लिए हालांकि अलग से एक फीसदी देने की मांग है।"
उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ बांटने के लिए इस्तेमाल होने वाली नामावली प्रणाली को लेकर भी सवाल उठे हैं। इस बात की चिंता जताई गई है कि नामावली तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान एक वर्ग को अधिक हिस्सा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही आंतरिक आरक्षण देने के लिए मान गई है।
उन्होंने बताया कि आरक्षण के बंटवारे में भ्रम को लेकर कुछ बातें सामने आई हैं। चिंता जताई गई है कि नामावली तैयार करने के दौरान किसी एक खास वर्ग को आरक्षण का अधिक हिस्सा मिल सकता है। इस मामले पर कैबिनेट की बैठक में फिर से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरक्षण सीमा से जुड़े कानूनी पहलू भी चल रही चर्चा का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि अदालत ने 56 फीसदी आरक्षण सीमा पर भी रोक लगा दी है। ये अहम मामले हैं जिन पर कोई भी फैसला लेने से पहले अच्छी तरह चर्चा करने की जरूरत है। कैबिनेट की बैठक में बातचीत के दौरान मतांतर होना आम बात है लेकिन चर्चा के बाद आखिरी फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "इसीलिए हम कैबिनेट में इस पर चर्चा कर रहे हैं। राय में अंतर होना तो लाजिमी है। राय चाहे जो भी हो, कैबिनेट में बहस के बाद आखिरी फैसला लिया जाएगा।" उन्होंने कहा कि उनके विभाग में भर्ती के आदेश बुधवार को जारी कर दिए गए थे और भर्ती प्रक्रिया के दौरान आंतरिक आरक्षण प्रणाली लागू की जाएगी।
उन्होंने कहा, "हमारे विभाग में भर्ती के आदेश कल जारी कर दिए गए थे। इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान आंतरिक आरक्षण लागू किया जाएगा। गुरुवार की कैबिनेट बैठक में यह चर्चा का मुख्य विषय होगा।"
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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