क्या रूस छोड़कर अमेरिका से तेल खरीदना होगी भारत की मजबूरी, सरकार ने दिया जवाब
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुएं खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने इसे एक अत्यंत रूढ़िवादी आंकड़ा बताते हुए कहा कि यह संख्या उस देश के लिए बहुत कम है, जो 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अमेरिका से तेल खरीदना भारत के रणनीतिक हित में है। साथ ही उन्होंने कहा कि तेल खरीदने को लेकर फैसले घरेलू खरीदार की तरफ से ही लिए जाते हैं। हालांकि, उन्होंने रूसी तेल से जुड़े सवाल पर स्पष्ट उत्तर नहीं दिया है। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के बाद अब भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगाया गया है।
समाचार एजेंसी एएनआई से चर्चा में गोयल ने कहा, 'अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी या एलपीजी खरीदना भारत के रणनीतिक हित में है, क्योंकि हम सोर्सेज में विविधता ला रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'लेकिन फैसले खरीदारों की तरफ से खुद ही लिए जाते हैं। ट्रेड डील यह तय नहीं करता कि कौन किससे और क्या खरीदेगा।' उन्होंने कहा कि समझौते मुख्य रूप से दो देशों के बीच कारोबार को गति प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, 'व्यापार समझौता यह सुनिश्चित करता है कि व्यापार का रास्ता आसान हो और हमें विशेष पहुंच मिले। एफटीए का मतलब ही होता है अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में विशेष पहुंच पाना। इसलिए आज, जब हमारे पास 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क है, तो हमें दूसरे विकासशील देशों पर बढ़त मिलती है, जो आम तौर पर हमारे प्रतिस्पर्धी होते हैं। और इसी वजह से मुक्त व्यापार समझौता बहुत आकर्षक बन जाता है।'
जब सवाल किया गया कि क्या इस डील का प्रभाव रूसी तेल को लेकर भारत के रुख पर भी पड़ा है। इस पर उन्होंने कहा कि वह इस काम को नहीं देखते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में विदेश मंत्रालय ज्यादा बेहतर जवाब दे सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कई मंत्रालय कई मुद्दों पर बात करते हैं। ट्रेड डील से जुड़ी बातें उनके दायरे में आती हैं। वैसे ही जियोपॉलिटिकल मामलों पर विदेश मंत्रालय का करता है।
500 अरब डॉलर के बिजनेस पर क्या बोले
पीटीआई भाषा से बातचीत में गोयल ने कहा कि भारत को अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुएं खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने इसे एक अत्यंत रूढ़िवादी आंकड़ा बताते हुए कहा कि यह संख्या उस देश के लिए बहुत कम है, जो 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है।
उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि तेल, एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल के अलावा हमें केवल विमानन क्षेत्र के लिए ही कम से कम 100 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता है।'
द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे पर दोनों पक्षों द्वारा शनिवार को जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस वक्त भारत अमेरिका से लगभग 300 अरब डॉलर के उन सामानों का आयात कर सकता है, जो वह फिलहाल दूसरे देशों से खरीद रहा है।

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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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