भाजपा के खिलाफ इस बडे़ नेता से हाथ मिलाएंगे CM विजय? क्या है स्प्लिट अलायंस
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम और डीएमके को एकजुट होने की सलाह दी जा रही है। इधर, डीएमके नेताओं ने ऐसी संभावनाओं से साफ इनकार कर दिया है। इस बीच स्प्लिट अलायंस की चर्चाएं जारी हैं।

CM सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाली TVK यानी तमिलगा वेत्री कषगम सरकार में विदुथलाई चिरुथिगल काच्चि की एंट्री हो चुकी है। अब इसके प्रमुख ने थोल थिरुमावलवन ने प्रस्ताव दिया है कि टीवीके और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम को भारतीय जनता पार्टी का सामना करने के लिए साथ आ जाना चाहिए। इसके साथ ही राज्य में स्प्लिट अलायंस की चर्चा जोर पकड़ रही थी। हालांकि, एमके स्टालिन की डीएमके ने इससे साफ इनकार कर दिया है।
भाषा के अनुसार, थिरुमावलवन ने दावा किया कि भाजपा और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ एक राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की जरूरत है। उन्होंने केरल या पश्चिम बंगाल मॉडल की तर्ज राष्ट्रीय स्तर पर एक संयुक्त मोर्चा बनाने का सुझाव दिया।
DMK ने क्यों किया मना
द्रमुक और टीवीके तमिलनाडु में एक दूसरे के राजनीतिक शत्रु हैं। द्रमुक ने थिरुमावलवन की राय को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसी व्यवस्था काम नहीं करेगी। द्रमुक ने कहा कि उसका नेतृत्व विदुथलाई चिरुथिगल काच्चि का प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगा।
स्प्लिट अलायंस मॉडल
द्रमुक सांसद गणपति राजकुमार ने तर्क दिया कि तमिलनाडु में 'स्प्लिट-अलायंस' मॉडल काम नहीं कर सकता और उनकी पार्टी इस बात पर अडिग है कि वह टीवीके के साथ कोई मंच साझा नहीं करेगी, क्योंकि टीवीके ने द्रमुक को अपना मुख्य राजनीतिक दुश्मन घोषित किया है। स्प्लिट-अलायंस' मॉडल में दो राजनीतिक दल राज्य स्तर पर एक दूसरे के विरोधी होते हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर किसी तीसरे दल का विरोध करने के लिए साथ आ जाते हैं।
DMK और VCK में तनाव
हाल में वीसीके प्रमुख ने अरियालुर में पत्रकारों से कहा था, 'मोर्चे में द्रमुक और टीवीके दोनों को जगह मिलनी चाहिए।' वैसे तो वीसीके ने द्रमुक से अपना नाता तोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अप्रैल में विधानसभा चुनाव में द्रमुक की हार के बाद दोनों पार्टियों के बीच तनाव पैदा हो गया। यह तनाव तब शुरू हुआ जब कांग्रेस, आईयूएमएल और वीसीके जैसे द्रमुक सहयोगी एक-एक करके टीवीके सरकार में शामिल हो गए। जबकि वामदलों ने सरकार को बिना किसी शर्त के समर्थन दिया।
डीएमके पर हमलावर भी रही
यह वैचारिक बहस रविवार को एक खुली राजनीतिक लड़ाई में बदल गई, जब थिरुमावलवन ने द्रमुक पर तीखे हमले किए। तिरुवन्नामलाई और धर्मपुरी में उन्होंने द्रमुक पर अपने सहयोगियों के साथ 'खराब व्यवहार' करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि द्रमुक ने सत्ता में हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया था और यही उनके चुनावी नुकसान की वजह थी।
उन्होंने कहा, 'अगर द्रमुक ने गठबंधन सरकार बनाने की बात कही होती और अपने सहयोगियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें उनकी पसंद की सीटों और निर्वाचन क्षेत्रों की संतोषजनक संख्या दी होती, तो शायद उसे इतना बड़ा झटका नहीं लगता।' उन्होंने द्रमुक पर दलित-बहुल पार्टी को कमजोर करने के मकसद से वीसीके के पूर्व विधायक पनैयुर बाबू को 'अपनी ओर करने' का आरोप भी लगाया।
AIADMK का भी जिक्र
तंजावुर में थिरुमावलवन ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि द्रविड़ राजनीति का भविष्य सवालों के घेरे में है, क्योंकि द्रमुक अलग-थलग पड़ रही है और अन्नाद्रमुक में टूटफूट हो रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय नेतृत्व की इस कमजोरी का फायदा बाहरी ताकतें उठा रही हैं। इनमें खासकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हैं।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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