'पार्टी का तृणमूलीकरण नहीं होने देंगे', TMC के बागियों को भाजपा का झटका; बंद किए दरवाजे
पश्चिम बंगाल में TMC की अंदरूनी कलह के बीच BJP अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने साफ किया कि पार्टी में किसी भी दागी नेता की एंट्री नहीं होगी। जानिए बंगाल राजनीति का यह ताजा घटनाक्रम।

पश्चिम बंगाल में सत्ता से बेदखल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर खींचतान मची है और बगावती सुर तेज हो गए हैं। इस बीच बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि बीजेपी किसी भी "दागी" टीएमसी नेता को पार्टी में शामिल नहीं करेगी और "बीजेपी का तृणमूलीकरण" कभी नहीं होने दिया जाएगा।
बीजेपी ने टीएमसी नेताओं के लिए बंद किए दरवाजे
शमिक भट्टाचार्य ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में टीएमसी नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "टीएमसी के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं। हमने बिना किसी को शामिल किए 207 का आंकड़ा छुआ है। जनता ने टीएमसी नेताओं के खिलाफ वोट दिया है। इस बार हमारी राजनीतिक रणनीति निचले स्तर से शुरू हुई थी। हम दागी लोगों को अपनी पार्टी में कैसे शामिल कर सकते हैं? बीजेपी का तृणमूलीकरण कभी नहीं होगा।"
टीएमसी की अंदरूनी कलह पर तंज
बीजेपी अध्यक्ष ने टीएमसी में चल रही मौजूदा उथल-पुथल पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि टीएमसी अब "खुद के ही खिलाफ" लड़ रही है। भट्टाचार्य ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता ने टीएमसी को पूरी तरह नकार दिया है और अब उनके लिए "खेल खत्म" हो चुका है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शनों पर भी तंज कसते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को विरोध नहीं करने देगी। टीएमसी अब सड़कों पर उतरकर जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं है। हर कोई जानता है कि जब पूर्व सीएम कोर्ट गई थीं तो क्या हुआ था। अब टीएमसी बनाम टीएमसी है। ममता बनर्जी ध्यान भटकाने के लिए दिल्ली की बात कर रही हैं।"
क्या है ताजा अपडेट
तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक रीताब्रता बनर्जी और बागी विधायकों ने बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मुलाकात की और 58 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, खेमे ने विधायक दल के लिए नये नेतृत्व ढांचे का भी प्रस्ताव रखा जिसके तहत रीताब्रता बनर्जी को विधायक दल का नेता और अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक बनाए जाने का सुझाव दिया गया।
चंद्रनाथ सिन्हा और शिउली साहा समेत कई बागी विधायक रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के साथ विधानसभा में अध्यक्ष के कक्ष तक गए, जहां ये दस्तावेज सौंपे गए। सूत्रों ने बताया कि समर्थन पत्रों पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें मध्यमग्राम के विधायक रथिन घोष भी शामिल हैं, जिन्होंने विधानसभा परिसर से रवाना होने से पहले रीताब्रता बनर्जी के समर्थन में दस्तखत किए।
एक अहम राजनीतिक संकेत देते हुए बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को अपनी ''चेयरपर्सन'' बताया है। इससे साफ होता है कि उनका विद्रोह पार्टी प्रमुख के खिलाफ नहीं, बल्कि विधायक दल के मौजूदा नेतृत्व ढांचे के खिलाफ है।
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लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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