अकाली-बीजेपी फिर साथ आएंगे? 2027 पंजाब चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
हाल ही में संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच लगभग 10 मिनट की सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई।

पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन की अटकलों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। हालांकि, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि बीजेपी पंजाब की जनता के साथ गठबंधन में है और सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल 'राजनीतिक बयानबाजी' के रूप में देख रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की बैठक: राजनीतिक मोड़
हाल ही में संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच लगभग 10 मिनट की सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई।
2020-2026: बीजेपी-अकाली दल के रिश्तों का सफर
- 2020 (सितंबर): कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने 24 साल पुराना गठबंधन तोड़ा।
- 2022-2024: दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा; वोट बिखराव से दोनों को नुकसान।
- अगस्त 2026: पीएम मोदी और सुखबीर बादल की 6 साल में पहली प्रत्यक्ष मुलाकात।
- यू-टर्न: बैठक के बाद अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर केंद्र का समर्थन किया
कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आधिकारिक मुलाकात थी। इस बैठक के तुरंत बाद सुखबीर बादल ने महिला आरक्षण बिल और केंद्र के परिसीमन विधेयक पर अपना रुख बदलते हुए केंद्र सरकार का समर्थन किया, जिसे गठबंधन की जमीन तैयार करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अकाली दल का राजनीतिक संकट और बीजेपी का गणित
दोनों दलों के लिए राजनीतिक मजबूरियां और चुनावी गणित इस प्रकार हैं।
अकाली दल के अस्तित्व की लड़ाई
अकाली दल अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।
- 2012: 56 सीटें (34.73% वोट)
- 2017: 15 सीटें (25.24% वोट)
- 2022 (अकेले चुनाव लड़ा): केवल 3 सीटें (18.38% वोट)
- 2024 लोकसभा: 1 सीट (13.48% वोट)
अकाली दल के पास अपना पारंपरिक 'पंथिक' और ग्रामीण वोट बैंक है, लेकिन सत्ता में वापसी या प्रभावी विपक्ष बनने के लिए उसे शहरी वोटों और एक राष्ट्रीय साथी की जरूरत है।
बीजेपी का शहरी वोट बैंक और ग्रामीण चुनौती
2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर करीब 18.65% हो गया। हालांकि वोट प्रतिशत बढ़ने के बावजूद बीजेपी अकेले एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई।
बीजेपी का आधार मुख्यतः पंजाब के शहरी क्षेत्रों में है। ग्रामीण इलाकों में पैठ बनाने के लिए उसे अकाली दल जैसे क्षेत्रीय सिख-केंद्रित साथी की सख्त आवश्यकता है।
विरोधी दलों में बेचैनी: AAP और कांग्रेस का रुख
संभावित गठबंधन की सुगबुगाहट पर पंजाब के सत्तारूढ़ दल और विपक्ष ने कड़ा हमला बोला है।
अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुटकी लेते हुए कहा कि अकाली दल दिल्ली के मंत्रिमंडल में जगह पाने या पंजाब में अस्तित्व बचाने के लिए बीजेपी के आगे मजबूर हो चुका है। AAP को डर है कि अगर बीजेपी और SAD साथ आते हैं, तो विरोधी वोटों का विभाजन रुक जाएगा।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सुखबीर बादल के परिसीमन पर लिए गए 'यू-टर्न' पर सवाल उठाते हुए कहा कि अकाली दल अपने अस्तित्व के लिए पंजाब के हितों से समझौता कर रहा है।
क्या सैनी के इनकार पर भरोसा किया जा सकता है?
हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी का इंकार एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। गठबंधन की बातचीत में अपनी शर्तें ऊपर रखने और अकाली दल पर दबाव बनाए रखने के लिए बीजेपी शीर्ष नेतृत्व फिलहाल सार्वजनिक रूप से "अकेले लड़ने" का दावा कर रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AAP और कांग्रेस को हराना है, तो बीजेपी का 'शहरी हिंदू आधार' और अकाली दल का 'ग्रामीण सिख आधार' मिलकर पंजाब में एक मजबूत सामाजिक और चुनावी समीकरण बना सकते हैं। इसलिए, 2027 के चुनावों के लिए इस पर्दे के पीछे चल रही बातचीत को खारिज नहीं किया जा सकता।


