कद्दू की सब्जी में नशीली गोलियां, प्रेमी संग मिलकर पति का कत्ल; ऐसे खुला पत्नी का खौफनाक राज

लाइव हिन्दुस्तान, बेंगलुरु
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बेंगलुरु में कद्दू की सब्जी में नशीली गोलियां मिलाकर पति की हत्या करने वाली पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद। मोबाइल की 2 घंटे की खामोशी और कॉल रिकॉर्ड्स ने खोला खौफनाक राज। पढ़ें पूरी क्राइम स्टोरी।

कद्दू की सब्जी में नशीली गोलियां, मुंह में कपड़ा और पत्थर से वार; बेंगलुरु का वो मर्डर केस जिसने सबको चौंकाया

बेंगलुरु में करीब एक दशक पुराने एक कैब ड्राइवर के मर्डर केस में अदालत ने पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस खौफनाक वारदात का खुलासा कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और वारदात की रात पत्नी की महज 2 घंटे की 'चुप्पी' से हुआ। गवाहों के मुकर जाने के बावजूद परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया।

वारदात की वह रात और बुनी गई झूठी कहानी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 22 मई 2017 का है। तड़के 3 बजे 32 वर्षीय कल्पना अपने घर (यशवंतपुर, बेंगलुरु) से बाहर भागी और पड़ोसियों से मदद मांगते हुए दावा किया कि उसके पति सतीश ने सुसाइड की कोशिश की है। पड़ोसी और कल्पना उसे एमएस रमैया अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस को शुरू में लगा कि शराब की लत या किसी बीमारी के चलते उसने जान दी होगी। लेकिन पोस्टमॉर्टम में सतीश के शरीर में नींद की गोलियों का अंश मिला और गले पर निशान पाए गए।

रिश्तेदार के शक ने पलटा पूरा केस

अगले दिन सतीश के एक रिश्तेदार कृपा शंकर ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस को अहम जानकारी दी। उसने बताया कि 18 अप्रैल 2017 को कल्पना अपने दो बच्चों के साथ गायब हो गई थी और वह बेल्लारी जिले में अपने पूर्व सहकर्मी और प्रेमी जावेद बाशा (जो कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने की कोशिश कर रहा था) के साथ मिली थी। हालांकि, तब परिवार ने कल्पना और बच्चों को वापस सतीश के पास भेज दिया था।

कॉल रिकॉर्ड्स और 2 घंटे की 'खामोशी' ने खोला राज

इस सुराग के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर वाई. मुद्दूराज ने जांच तेज की और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाले। इसमें चौंकाने वाली टाइमलाइन सामने आई।

  • 22 मई 2017 को दोपहर 2:40 से रात 11:35 बजे के बीच कल्पना और जावेद के बीच कई बार कॉल पर बात हुई।
  • इसके बाद आधी रात 12:23 से 12:29 बजे तक फिर बात हुई।
  • लेकिन 12:29 बजे से 2:36 बजे के बीच दोनों के फोन एकदम शांत रहे, कोई कॉल नहीं हुई।

डॉक्टरों के मुताबिक, सतीश की मौत रात करीब 1 बजे हुई थी। पुलिस जांच में यह भी साफ हो गया कि हत्या के वक्त जावेद की लोकेशन कल्पना का घर ही थी।

कद्दू की सब्जी में मिलाई थीं नींद की गोलियां

पुलिस की पूछताछ में कल्पना टूट गई और उसने पूरी साजिश उगल दी। जावेद ने बेल्लारी के एक मेडिकल स्टोर से 'अल्प्राजोलम' की गोलियां खरीदी थीं। घटना वाली रात कल्पना ने कद्दू की सब्जी में गोलियों का पाउडर मिलाकर सतीश को खिला दिया। जब सतीश गहरी नींद में चला गया, तो रात करीब 12:30 बजे जावेद घर में घुसा। दोनों ने सतीश के मुंह में कपड़ा ठूंसा और गला घोंट दिया। जब सतीश ने विरोध किया, तो जावेद ने उसे पत्थर से भी मारा।

बेटी मुकर गई, लेकिन सबूतों से मिली सजा

इस मामले में पुलिस ने 2017 में ही चार्जशीट दायर कर दी थी। सतीश और कल्पना की अपनी 12 साल की बेटी (जो अब 22 साल की है और एमबीए कर रही है), कल्पना की बहन और पड़ोसी भी ट्रायल के दौरान मुकर गए।

हालांकि, 4 जुलाई को बेंगलुरु की 66वीं अतिरिक्त सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट के जज जयप्रकाश ए. ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों को मजबूत माना। अदालत ने कहा कि सीधे चश्मदीद गवाह न होने के बावजूद कड़ियों का जुड़ना सजा के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने कल्पना और जावेद को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई (हालांकि सबूत मिटाने से जुड़ी धारा 201 और 204 में बरी कर दिया)। साथ ही, जज ने बिना किसी सहारे के छूटे बच्चों की स्थिति देखते हुए उन्हें कानूनी सेवा प्राधिकरण के जरिए उचित मुआवजा देने की भी सिफारिश की है।

Amit Kumar

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