Hindi NewsIndia NewsWidowed daughter in law also has right on father-in-laws property Supreme Court
ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी हक, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी हक, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिंदू एडॉप्टेशन ऐंड मेंटिनेंस ऐक्ट 1956 के तहत ससुर की मौत के बाद उसकी विधवा बहू भी संपत्ति से भरण पोषण की हकदार है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने यह फैसला सुनाया है।

Jan 13, 2026 07:59 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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विधवा महिलाओं के हक में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण पोषण अधिनियम 1956 के तहत ससुर की मौत के बाद विधवा बहू भी उनकी संपत्ति से मेंटिनेंस का दावा कर सकती है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने दीवानी अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस ऐक्ट की धारा 21 (VII) में विधवा बहू को भी शामिल किया गया है। पति की मौत ससुर की मौत से पहले हुई हो या बाद में, विधवा बहू उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार है।

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क्या है पूरा मामला

यह मामला डॉ. महेंद्र प्रसाद के वारिसों के बीच का था जिनकी दिसंबर 2021 को मौत हो गई थी। डॉ. महेंद्र प्रसाद की बहू गीता शर्मा उनकी संपत्ति से भरण पोषण की मांग कर रही थी। उनके पति की मौत 2023 में हो गई थी। फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए मेंटनिनेंस दिलाने से इनकार कर दिया था कि ससुर की मौत के समय उनके पति जीवित थे। हालांकि हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि उनकी जरूरत के हिसाब से मेंटिनेंस का निर्देश दे। हाई कोर्ट के आदेश को परिवार के बाकी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इन सदस्यों में डॉ. प्रसाद के दूसरे बेटे की विधवा बहू और लंबे समय तक लिवइन पार्टनर के रूप में रहने का दावा करने वाली महिला भी शामिल है।

इस कानून के सेक्शन 21 में डिपेंडेंट्स के बारे में बताया गया है। इसके सब सेक्शन VIII में कहा गया है कि किसी शख्स के बेटे की विधवा भी उसकी संपत्ति से मेंटिनें की हकदार है, जब तक कि वह दूसरा विवाह नहीं करती है। इसके लिए शर्त है कि वह पति की संपत्ति या अपने पुत्र या पुत्री की संपत्ति से भरण पोषण प्राप्त करने में असमर्थ होनी चाहिए।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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