Explainer: महिला आरक्षण के लिए परिसीमन में 2011 वाली जनगणना पर क्यों बवाल, दक्षिण भारत का क्या होगा
कई विपक्षी दलों का कहना है कि नई जनगणना के आधार पर परिसीमन हो। वहीं कई दलों ने सुझाव दिया है कि जनगणना और परिसीमन को लिंक ही ना किया जाए। डीएमके ने तो इसके खिलाफ पूरे तमिलनाडु में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। खुद सीएम एमके स्टालिन ने इसे काला कानून बताया और बिल की कॉपी फाड़ दी।

महिला आरक्षण को लागू करने के लिए संशोधन विधेयक संसद में लाए जा रहे हैं। इसके लिए तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस बीच कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है और विरोध की बात कही है। इनका कहना है कि हम महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन परिसीमन को लेकर हमारा विरोध है। इनमें से कई दलों का कहना है कि नई जनगणना के आधार पर परिसीमन हो। वहीं कई दलों ने सुझाव दिया है कि जनगणना और परिसीमन को लिंक ही ना किया जाए। डीएमके ने तो इसके खिलाफ पूरे तमिलनाडु में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। खुद सीएम एमके स्टालिन ने इसे काला कानून बताया और बिल की कॉपी फाड़ दी।
अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि लोकसभा और विधानसभा की सीटें सीधे तौर पर दोगुनी होंगी या फिर उन्हें 2011 की जनगणना से लिंक किया जाएगा। अब यदि दक्षिण भारत के राज्यों की बात की जाए तो उनकी आबादी में बीते कई दशकों से यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली जैसे उत्तर भारत के क्षेत्रों के मुकाबले आबादी की ग्रोथ कम रही है। वहीं 2002 में जो परिसीमन हुआ था, उसे 1991 की जनगणना के आधार पर किया गया था और उसमें सीटों की संख्या नहीं बदली थी। अब यदि सीटें दोगुनी हो रही हैं और उन्हें 2011 की जनगणना से लिंक किया गया तो फिर साउथ इंडिया के राज्यों पर असर हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि 1991 से 2011 तक उनकी आबादी आनुपातिक रूप से कम हुई है।
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 1991 के मुकाबले 2011 की जनगणना में दक्षिण भारत के राज्यों की आबादी आनुपातिक रूप से कम हुई थी। 2011 की जनगणना के आंकड़े के अनुसार 1991 की तुलना में साउथ के राज्यों की जनसंख्या वृद्धि दर में 13.3 फीसदी की गिरावट आई थी। ऐसे में यदि उसी जनगणना को आधार बनाकर सीटों का परिसीमन हुआ तो फिर साउथ के राज्यों को नुकसान हो सकता है। इसी दलील के आधार पर एमके स्टालिन समेत दक्षिण भारत के ज्यादातर नेता विरोध कर रहे हैं।
सीटें हर राज्य में डबल होंगी या आबादी से लिंक? क्या होगा
हालांकि अब तक साफ नहीं है कि यह परिसीमन राज्यों में सीटों का अनुपात कम करेगा अथवा सीटों को सीधे डबल करते हुए राज्यों के भीतर ही आबादी के अनुसार नई सीटें बनेंगी। ऐसे में बिल की पूरी कॉपी आने तक का इंतजार करना होगा। वहीं सरकार के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि सभी राज्यों का अनुपात पहले की तरह ही रहेगा। उसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
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