कॉकरोच बनना चाहते हैं विजय माल्या, बोले- उनकी तरफ जिंदगी बेहतर है
विजय माल्या ने ‘शायद कॉकरोच बन जाना चाहिए’ वाला पोस्ट कर हलचल मचा दी है। उनके ‘अन्याय’ के दावे और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच क्या कनेक्शन है? जानिए विजय माल्या, CJP और पूरे विवाद की कहानी।

भारत के भगोड़े कारोबारी विजय माल्या भी 'कॉकरोच' बनना चाहते हैं। माल्या ने खुद के साथ हुए कथित ‘अन्याय’ का दावा करते हुए अपनी तुलना ‘कॉकरोच’ से की है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन लगातार सुर्खियों में है। इसी कॉकरोच आंदोलन ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
माल्या ने क्या लिखा?
अपने एक्स हैंडल पर विजय माल्या ने लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”
गौरतलब है कि 2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द भारत की सोशल मीडिया राजनीति में एक अलग प्रतीक बन गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। आंदोलन ने बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक आवाज जैसे मुद्दों को उठाया।
CJP का नाम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद चर्चा में आया था।
CJP ने इसी कॉकरोच शब्द को अपमान के बजाय अपने लिए एक व्यंग्यात्मक पहचान में बदल दिया। आंदोलन सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंचा और शिक्षा तथा परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किए। जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दबाव में आकर इस्तीफा दे दिया था।
विजय माल्या कौन हैं?
विजय माल्या कभी भारत के चर्चित कारोबारी चेहरों में शामिल थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। किंगफिशर एयरलाइंस के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।
माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार उन्हें वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चला रही है।
माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया पोस्ट में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों के कारण वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।
माल्या का ‘अन्याय’ वाला दावा क्या है?
माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में उनके साथ अन्याय हुआ है। हालिया बयानों में उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक माल्या ने दावा किया कि उनकी करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी को करीब 6,203 करोड़ रुपये बता रहे हैं। यह आंकड़ा माल्या का दावा है; इसे उनके पक्ष का बयान समझना जरूरी है, न कि अदालत द्वारा स्थापित तथ्य।
अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत में कहा था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।
CJP अब भी क्यों चर्चा में है?
कॉकरोच जनता पार्टी हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में CJP समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।
9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।
इसी बीच CJP से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।


