भारत को शक की नजर से देख रहा अमेरिका, 'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' में डाला नाम; किस बात का डर?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अमेरिका ने एक बार फिर भारत को बौद्धिक संपदा नियमों, पेटेंट और भारी कस्टम ड्यूटी को लेकर अपनी 'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' में रखा है। जानिए USTR की रिपोर्ट में भारत के अलावा चीन और किन देशों के नाम शामिल हैं और अमेरिका की मुख्य चिंताएं क्या हैं।

भारत को शक की नजर से देख रहा अमेरिका, 'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' में डाला नाम; किस बात का डर?

हाल ही में, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय ने अपनी '2026 स्पेशल 301 रिपोर्ट' जारी की है। इस रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत को एक बार फिर अपनी 'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' में बरकरार रखा है। भारत के अलावा इस सूची में चीन, रूस, इंडोनेशिया, चिली और वेनेजुएला जैसे देश भी शामिल हैं। अमेरिका ने कहा है कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत सहित अन्य माध्यमों से इस मुद्दे पर चर्चा करेगा।

'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' क्या है?

हर साल अप्रैल के अंत में अमेरिका अपनी 'स्पेशल 301 रिपोर्ट' जारी करता है। इस रिपोर्ट में अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदार देशों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के संरक्षण और लागू करने के तरीकों की समीक्षा करता है। जो देश अमेरिकी कंपनियों के पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते हैं, उन्हें 'वॉच लिस्ट' या अधिक गंभीर 'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' में डाल दिया जाता है। इस सूची में आने का मतलब तत्काल प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यह व्यापारिक वार्ताओं में दबाव बनाने और कड़ी निगरानी रखने का एक तरीका है।

भारत को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

USTR की गुरुवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक बौद्धिक संपदा (IP) के संरक्षण और उसे लागू करने के मामले में भारत की प्रगति 'अस्थिर' रही है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है, "आईपी संरक्षण और प्रवर्तन के मामले में भारत अभी भी दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।" हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत सरकार द्वारा अपनी आईपी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों पर गौर किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पुरानी रिपोर्ट्स में उठाई गई कई लंबी चिंताओं पर अभी भी 'प्रगति का अभाव' है।

भारत को लेकर अमेरिका की प्रमुख चिंताएं क्या हैं?

रिपोर्ट में भारत से जुड़ी कई कमियों को उजागर किया गया है, जिन्हें नीचे दिए गए पॉइंटर्स में आसानी से समझा जा सकता है।

भारतीय पेटेंट अधिनियम: अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता इंडियन पेटेंट एक्ट को लेकर है। इसके तहत अक्सर अमेरिकी कंपनियों, विशेषकर बड़ी फार्मा (दवा) कंपनियों के आवेदनों पर सवाल खड़े किए जाते हैं। साथ ही यह सरकार को बहुत ज्यादा छूट देता है। मामलों का लंबे समय तक लंबित रहना भी अमेरिका के लिए पुरानी परेशानी का कारण रहा है।

भारतीय पेटेंट अधिनियम की 'धारा 3(d)' किसी भी पुरानी दवा में मामूली बदलाव करके उसका नया पेटेंट हासिल करने पर रोक लगाती है। अमेरिकी दवा कंपनियां चाहती हैं कि उन्हें मामूली बदलावों पर भी नया पेटेंट मिले ताकि उनका एकाधिकार बना रहे, लेकिन भारत इसे खारिज कर देता है। अमेरिका का मानना है कि इससे उनके इनोवेटर्स को नुकसान होता है।

डेटा की सुरक्षा: रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टेकहोल्डर्स को इस बात की चिंता है कि क्या भारत के पास फार्मास्युटिकल और कृषि रसायनों की मार्केटिंग मंजूरी के लिए तैयार किए गए गुप्त डेटा के अनधिकृत खुलासे और अनुचित व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए कोई प्रभावी प्रणाली है या नहीं।

भारी कस्टम ड्यूटी: रिपोर्ट में भारत द्वारा आईपी-आधारित उत्पादों पर लगाई जाने वाली उच्च सीमा शुल्क की भी आलोचना की गई है। इनमें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पाद, सौर ऊर्जा उपकरण, चिकित्सा उपकरण, दवाएं और कैपिटल गुड्स शामिल हैं। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने भी टैरिफ को लेकर भारत पर बार-बार निशाना साधा है।

कॉपीराइट और ट्रेडमार्क नियमों को सख्ती से लागू ना करना और भारी मात्रा में होने वाली जालसाजी को लेकर भी चिंताएं पहले की तरह बरकरार हैं। भारत सरकार के पास यह अधिकार है कि वह जनहित में (मसलन, जीवन रक्षक दवाओं को सस्ता बनाने के लिए) किसी भी पेटेंटेड दवा को बनाने का लाइसेंस किसी तीसरी कंपनी को दे सकती है। अमेरिकी कंपनियों को डर है कि इससे उनका भारी मुनाफा कम हो जाता है।

लिस्ट में और कौन-कौन से देश हैं शामिल?

प्रायोरिटी वॉच लिस्ट: इस लिस्ट में भारत और चीन के अलावा रूस, इंडोनेशिया, चिली और वेनेजुएला के नाम शामिल हैं।

वियतनाम पर एक्शन की तैयारी: वियतनाम को 'प्रायोरिटी फॉरेन कंट्री' की श्रेणी में रखा गया है। 13 साल में पहली बार कोई देश इस कैटेगरी में शामिल हुआ है। अगले 30 दिनों में USTR तय करेगा कि रिपोर्ट में बताए गए आधार पर वियतनाम के खिलाफ 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत जांच शुरू की जाए या नहीं।

अर्जेंटीना हुआ बाहर और EU शामिल: इस साल अर्जेंटीना को प्रायोरिटी वॉच लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। वहीं, भौगोलिक संकेतक और हालिया फार्मास्युटिकल नियमों से जुड़ी अमेरिकी चिंताओं के कारण यूरोपीय संघ (EU) को वॉच लिस्ट में जोड़ा गया है।

संक्षेप में कहें तो अमेरिका का 'डर' मुख्य रूप से उसकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आर्थिक मुनाफे और एकाधिकार से जुड़ा है। वे चाहते हैं कि भारत अपने कानून उनके पक्ष में बनाए। दूसरी ओर, भारत को विदेशी कंपनियों के मुनाफे के साथ-साथ अपने नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा और सस्ते उत्पादों की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाकर चलना है। यही कारण है कि 1990 के दशक से ही भारत लगातार इस अमेरिकी सूची में बना हुआ है।

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Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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