IPS अजय पाल शर्मा को लेकर बंगाल में क्यों बवाल? ‘फेयर एंड लवली बबुआ’ पर SC में भी जंग
IPS Ajay Pal Sharma को महुआ मोइत्रा ने 'फेयर एंड लवली बबुआ' तक कह दिया। वहीं, उन्हें बंगाल से तुरंत बाहर निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

IPS Ajay Pal Sharma: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है। हालांकि, इससे ठीक पहले बंगाल की सियासत में 'सिंघम' और 'पुष्पा' की एंट्री हो गई है। उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय पाल शर्मा इस समय बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निशाने पर हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें बतौर प्रयवेक्षक बंगाल में जिम्मेदारी दी है। यह मामला केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा। महुआ मोइत्रा ने उन्हें 'फेयर एंड लवली बबुआ' तक कह दिया। वहीं, उन्हें बंगाल से तुरंत बाहर निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
विवाद की शुरुआत दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से हुई। चुनाव आयोग ने अजय पाल शर्मा को यहां पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें आईपीएस अयज पाल शर्मा टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पहुंचे और उनके परिवार को सख्त लहजे में चेतावनी दी। अजय पाल शर्मा ने कहा कि अगर मतदाताओं को डराने-धमकाने या बदमाशी की शिकायत मिली, तो अंजाम बुरा होगा। उन्होंने जहांगीर के परिवार से कहा कि उसे समझा देना, बाद में रोना मत।
टीएमसी का पलटवार
जहांगीर खान ने इसे सीधे तौर पर डराने की कोशिश बताया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "अगर वह खुद को सिंघम समझते हैं, तो हम भी पुष्पा हैं। फाल्टा की मिट्टी पर किसी को डराने नहीं दिया जाएगा।"
महुआ मोइत्रा का तंज- "फेयर एंड लवली बबुआ"
टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने इस विवाद में घी डालने का काम किया। उन्होंने अजय पाल शर्मा का एक पुराना कथित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और उन्हें "फेयर एंड लवली बबुआ" कहकर संबोधित किया। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार और गंभीर आपराधिक साजिश के आरोप रहे हों, उसे निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है?
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
टीएमसी ने अजय पाल शर्मा की नियुक्ति को चुनौती देते हुए कानूनी मोर्चा खोल दिया है। सबसे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उनके आचरण पर सवाल उठाए गए, हालांकि शुरुआती खबरों के मुताबिक कोर्ट ने तुरंत हस्तक्षेप करने से इनकार किया। टीएमसी का तर्क है कि उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को जानबूझकर बंगाल में टीएमसी को दबाने के लिए भेजा गया है। पार्टी का कहना है कि उनकी नियुक्ति चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
इस बवाल के बीच फाल्टा में एक महिला ने अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि अधिकारी ने जबरन उसके घर में घुसकर मारपीट की और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाया। तनाव बढ़ता देख चुनाव आयोग ने फाल्टा के संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है।
फाल्टा में साख की लड़ाई
अजय पाल शर्मा को लेकर हो रहा यह बवाल केवल एक अधिकारी की कार्यशैली का विरोध नहीं है, बल्कि बंगाल चुनाव में TMC बनाम BJP की बड़ी जंग का हिस्सा है। भाजपा उन्हें "कानून का राज" स्थापित करने वाला जांबाज बता रही है, वहीं टीएमसी उन्हें "सत्ता का हथियार" करार दे रही है।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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