भाजपा की नई टीम से तेजस्वी सूर्या का पत्ता कटा, AAP और कांग्रेस से आए चेहरों पर भरोसा
BJP Reshuffle: नितिन नवीन की नई टीम में स्मृति ईरानी की वापसी हुई है। अमित मालवीय और तेजस्वी सूर्या की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। युवा मोर्चे समेत संगठन में कई अहम बदलाव हुए हैं।

BJP Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में कई पुराने चेहरों को जगह नहीं मिली है। इनमें बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और पार्टी के युवा चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले तेजस्वी सूर्या का नाम भी शामिल है। नई टीम में पार्टी ने कुछ ऐसे नेताओं पर भी भरोसा जताया है, जो हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
भाजपा की नई संगठनात्मक टीम को 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी के भीतर इन बदलावों को हालिया CJP प्रदर्शनों के बाद संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
स्मृति ईरानी की वापसी, अमित मालवीय की जिम्मेदारी खत्म
फेरबदल में सबसे अहम नाम स्मृति ईरानी का है। उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है। पार्टी के अंदर इसे सिर्फ उनकी वापसी के तौर पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बीजेपी के अभियान को और धार देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, अमित मालवीय को आईटी सेल और सोशल मीडिया प्रमुख के पद से हटा दिया गया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसे फिलहाल विवादों में आए लोगों को किनारे करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। नई व्यवस्था में संबंधित यूनिट का नाम सिर्फ ‘सोशल मीडिया’ रखा गया है।
युवा मोर्चा में भी बदलाव, तेजस्वी सूर्या का पत्ता कटा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या की जगह हेमंग जोशी को जिम्मेदारी दी गई है। इसके पीछे युवा मोर्चा के Gen Z से प्रभावी तरीके से जुड़ने और हालिया शहरों में हुए प्रदर्शनों का मुकाबला करने में कथित नाकामी को वजह माना जा रहा है। भाजपा के युवा और मुखर नेताओं में गिने जाने वाले तेजस्वी सूर्या पिछली राष्ट्रीय टीम में महत्वपूर्ण भूमिका में थे। सोशल मीडिया से लेकर संसद और पार्टी के सार्वजनिक अभियानों तक उनकी सक्रियता लगातार चर्चा में रही है। हालांकि, नई टीम में उन्हें जगह नहीं दी गई है।
इन बदलावों का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार और बीजेपी को ऑनलाइन और जमीन पर युवाओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के भीतर एक हलके का मानना है कि ऐसा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि वे इन प्रदर्शनों का प्रभावी जवाब नहीं दे पा रहे।
CJP को ऑनलाइन बड़ी बढ़त का जिक्र
पार्टी के अंदरूनी लोगों के मुताबिक, फेरबदल को CJP की ऑनलाइन लोकप्रियता के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। कुछ ही दिनों में CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने ऑनलाइन बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा और इंस्टाग्राम पर उसकी मौजूदगी बीजेपी और कांग्रेस दोनों से आगे निकल गई।
इसके अलावा दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई शहरों में युवाओं ने परीक्षा पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया। इन घटनाक्रमों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
पुराने नेताओं की फिर से संगठन में वापसी
नई टीम में ऐसे नेताओं की वापसी भी बड़ा संकेत मानी जा रही है, जो लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की पसंदीदा भूमिका में नहीं थे। माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने काफी समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी वाले दौर में बिताया था।
स्मृति ईरानी भी कुछ समय से संगठन में हाशिये पर थीं। उन्होंने न सिर्फ केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी जगह गंवाई थी, बल्कि उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से अपना चुनाव भी हार गई थीं।
AAP और कांग्रेस से आए चेहरों पर भरोसा
आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए संदीप पाठक को नई टीम में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। वहीं कांग्रेस से बीजेपी में आए रोहन गुप्ता को भी राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली है।
नवीन के करीबी युवा चेहरों को भी जगह
नई टीम में युवा नेताओं में स्वदेश सिंह और सिद्धार्थ शंभू को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। उन्हें नितिन नवीन का करीबी माना जाता है।
बिहार से आने वाले शिवेश कुमार राम को एससी मोर्चा का नया अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें भी नवीन के करीबी नेताओं में गिना जाता है।
हालांकि, आठ महासचिवों की सूची में दलित प्रतिनिधित्व नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आगे और नियुक्तियां हो सकती हैं।
नई टीम में अनुभव पर जोर, दक्षिण को सीमित प्रतिनिधित्व
बीजेपी की नई टीम में बड़ी संख्या में अनुभवी नेताओं को जगह मिली है। पार्टी के एक पूर्व पदाधिकारी के मुताबिक, नई टीम में न तो युवाओं और न ही दक्षिण भारत पर कोई खास फोकस दिखाई देता है। हालांकि, नए अध्यक्ष ने अपनी टीम तैयार की है।
पुरानी टीम से सिर्फ दो महासचिव- विनोद तावड़े और सुनील बंसल को दोबारा जगह मिली है। बाकी लगभग सभी सदस्यों के पास संगठन में काम करने का वर्षों का अनुभव है।
एक अन्य पार्टी नेता ने इसे बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष के नेतृत्व में बड़े बदलाव का संकेत बताया। उनके मुताबिक, स्मृति ईरानी जैसे नेताओं की वापसी महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे महासचिवों के बीच जहां पहले महिला प्रतिनिधित्व नहीं था। इस नेता के अनुसार, नवीन 2029 के लोकसभा चुनाव तक पार्टी और सरकार के लिए नई सोच और नया नैरेटिव तैयार करने की दिशा में काम करना चाहते हैं।
यूपी-पंजाब पर खास नजर
उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव नजदीक होने के बीच नवीन ने दोनों राज्यों से करीब आधा दर्जन महत्वपूर्ण चेहरों को टीम में शामिल किया है।
उत्तर प्रदेश से:
- रेखा वर्मा
- तारिक मंजूर
- कुंवर बासित अली, यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी
- अमरपाल मौर्य, ओबीसी नेता
पंजाब से:
- मनप्रीत बादल
- संदीप पाठक, पूर्व AAP सांसद
स्मृति ईरानी की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही?
स्मृति ईरानी ने 2014 में केंद्रीय मंत्री बनने से पहले महिला मोर्चा की अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव के तौर पर काम किया था। कांग्रेस, खासकर राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी की आक्रामक आवाज के तौर पर भी उनकी पहचान रही है।
इसकी अहमियत इसलिए भी बताई जा रही है क्योंकि Gen Z प्रदर्शनों के बाद राहुल गांधी युवाओं से जुड़े मुद्दों को देशभर में ज्यादा मुखर और आक्रामक तरीके से उठा रहे हैं।
ईरानी इससे पहले बीजेपी के लिए आक्रामक चेहरा और न्यू मीडिया में पार्टी की आवाज के तौर पर पहचान बना चुकी हैं। वहीं माधव ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुश्किल चुनावी परिस्थितियों को बदलने में बीजेपी की रणनीतिक क्षमता और प्रभावी अमल का प्रदर्शन किया था।
दक्षिण भारत में सीमित प्रतिनिधित्व
कांग्रेस के केरल, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में चुनावी प्रभाव बढ़ने के बाद बीजेपी से इस क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन नई टीम में दक्षिण भारत से सिर्फ छह सदस्यों को जगह मिली है। तेलंगाना को नई टीम में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।


