IIT से IIM तक, हजारों संस्थानों को SC की आखिरी चेतावनी- सुसाइड सर्वे में सहयोग करो वरना

IIT से IIM तक, हजारों संस्थानों को SC की आखिरी चेतावनी- सुसाइड सर्वे में सहयोग करो वरना

संक्षेप:

सीनियर एडवोकेट अपर्णा भट्ट ने अदालत को बताया कि 17 IITs, 15 IIMs, 16 AIIMS और 24 NITs ने अब तक सर्वे का जवाब नहीं दिया है, जबकि उन्हें चार बार याद दिलाया गया है। अब तक केवल 3,500 संस्थानों ने ही सर्वे का उत्तर भेजा है।

Oct 14, 2025 07:24 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि 57,000 से अधिक शैक्षणिक संस्थान सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सर्वेक्षण में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश IIT, IIM, AIIMS और NIT शामिल हैं।

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2018 से अब तक लगभग 98 छात्रों ने अपनी जान ली है, जिनमें से 39 आईआईटी, 25 एनआईटी, 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और 4 आईआईएम के छात्र शामिल हैं। लेकिन इस गंभीर समस्या के प्रति शैक्षणिक संस्थानों की उदासीनता ने सुप्रीम कोर्ट को निराश किया है। कोर्ट द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय पैनल की सर्वेक्षण प्रक्रिया में 57,000 शैक्षणिक संस्थानों ने सहयोग नहीं किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में गहरी नाराजगी जताई। वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अपर्णा भट ने कोर्ट को बताया कि 17 आईआईटी, 15 आईआईएम, 16 एम्स और 24 एनआईटी सहित कई प्रमुख संस्थानों ने चार बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद सर्वे में हिस्सा नहीं लिया। यह सर्वेक्षण सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है ताकि कैंपस में बढ़ती आत्महत्याओं के कारणों और उनके समाधान का पता लगाया जा सके। भट ने बताया कि अब तक केवल 3,500 संस्थानों ने ही सर्वे में जवाब दिया है।

कोर्ट ने कहा, "यह पूरी कवायद छात्रों के हित में की जा रही है और सभी संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस सर्वे में पूर्ण सहयोग करें ताकि राष्ट्रीय टास्क फोर्स इस विषय पर अपनी अंतरिम या अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सके।" पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार ने चार बार इन संस्थानों को सहयोग के लिए निर्देश दिए, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और सभी संस्थानों को एक बार फिर सर्वे में सहयोग करने के लिए कहे। पीठ ने कहा, "हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस मामले को बहुत गंभीरता से लें और सभी संस्थानों को सहयोग करने के लिए प्रेरित करें।" इस दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने स्वेच्छा से छात्रों के हित में सभी आईआईटी को इस सर्वे में शामिल होने और राष्ट्रीय टास्क फोर्स के साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी ली। वे अपने किसी और केस की सुनवाई के लिए मौजूद थे। कोर्ट ने उनके इस कदम की सराहना की।

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम सभी संस्थानों को सर्वे में सहयोग करने का आखिरी मौका देना चाहेंगे। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो हमें कुछ ऐसे आदेश पारित करने पड़ सकते हैं जो संस्थानों को पसंद न आएं और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।" कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस पहलू को सभी संस्थानों को स्पष्ट कर दे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक मल्टी टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसके प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज रविंद्र भट हैं। इस पैनल में मनोचिकित्सा और नैदानिक मनोविज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। पैनल को आत्महत्याओं के विभिन्न कारणों की पहचान करने और उनके समाधान सुझाने का काम सौंपा गया है। इन कारणों में रैगिंग, जातिगत भेदभाव, लिंग-आधारित भेदभाव, यौन उत्पीड़न, शैक्षणिक दबाव, आर्थिक बोझ, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा कलंक, नस्ल, जनजातीय पहचान, विकलांगता, यौन अभिविन्यास, राजनीतिक विचार, धार्मिक विश्वास या अन्य आधारों पर भेदभाव शामिल हैं।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति के वितरण में देरी के बारे में एमिकस की रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया और केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा, "हम जानना चाहेंगे कि छात्रवृत्ति के लिए आवेदन स्वीकृत होने के बाद भी छात्रों को राशि वितरित करने में देरी क्यों हो रही है।" सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों की मानसिक सेहत और आत्महत्या की घटनाओं को गंभीरता से लेने का यह समय है और सभी संस्थानों को बिना किसी देरी के इस सर्वेक्षण में सहयोग करना चाहिए।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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