सायोनी घोष ने ममता बनर्जी के साथ क्यों किया खेला, CM शुभेंदु अधिकारी से दिल्ली में मिलीं

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Saayoni Ghosh: विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़े स्तर पर फेरबदल किए थे। उस दौरान जादवपुर सांसद को भी बड़े पद पर नियुक्ति दी गई थी। अब दावा किया जा रहा है कि वह अब बागी सांसदों के साथ समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं।

सायोनी घोष ने ममता बनर्जी के साथ क्यों किया खेला, CM शुभेंदु अधिकारी से दिल्ली में मिलीं

सायोनी घोष, तृणमूल कांग्रेस से लोकसभा सांसद हैं। अब खबर है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बागी सांसदों की टीम में शामिल होने जा रहीं हैं। खबर है कि वह राजधानी दिल्ली में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मिली थीं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया। खास बात है कि मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी बनर्जी ने घोष को बड़ा पद दिया था।

शुभेंदु अधिकारी से हुई मीटिंग?

खबर है कि तृणमूल कांग्रेस के 4 और सांसद दिल्ली पहुंच थे और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर मीटिंग हुई थी। कहा जा रहा है इस बैठक में सायोनी घोष, माला रॉय और दो अन्य सांसद मौजूद थे। खास बात है कि इस मीटिंग में मुख्यमंत्री अधिकारी भी शमिल हुए थे।

जब ममता बनर्जी ने वफादारों पर जताया भरोसा

5 जून को ही ममता बनर्जी ने संगठन संकट के बीच बड़े स्तर पर फेरबदल किए थे। कहा जा रहा था कि उस दौरान उन्होंने अपने वफादारों और अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताया था। तब पीटीआई भाषा से बातचीत में एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा था, 'यह महज पुनर्गठन नहीं है। ऐसे समय में जब पार्टी अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है, ममता बनर्जी उन नेताओं पर भरोसा जता रही है जिनकी वफादरी दशकों से परखी जा चुकी है।'

सायोनी घोष को दिया बड़ा पद

तब बनर्जी ने सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि बाबर अली, पुलक रॉय, आशिमा पात्रा, अरूप बिस्वास और राजीव बनर्जी को राज्य महासचिव बनाया गया। साथ ही सायनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष और मधुरिमा ठाकुर को महासचिव के रूप में दोबारा नियुक्त किया गया।

क्यों छोड़ रहीं हैं TMC का साथ

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, घोष से जुड़े एक करीबी सूत्र बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी शिकायत पार्टी से तब समर्थन नहीं मिलना है, जब वह प्रचार के दौरान जनता के निशाने पर आ गईं थीं। कहा जा रहा है कि वह घटनाक्रमों के बाद अलग-थलग महसूस कर रही थीं और दावा कर रही थीं कि पार्टी से कोई भी उनके साथ कोई भी वरिष्ठ नेता मौजूद नहीं था।

बागी गुट में शामिल

सांसदों के बागी गुट की अगुवाई कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने 20 से ज्यादा सांसदों के समर्थन का दावा किया था। बुधवार को इस गुट में शामिल होने वाले नेताओं में घोष, रॉय, शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान जैसे चर्चित नेताओं का नाम शामिल हो चुका था। इसके अलावा पार्टी के राज्यसभा सांसद भी लगातार इस्तीफे दे रहे हैं।

अगर TMC जीत जाती तो?

चुनाव से पहले तक घोष लगातार ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कोशिश करने की बात कर रही थीं। नतीजों के बाद भी उन्होंने कहा था कि वह टीएमसी के साथ बनी रहेंगी। खास बात है कि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी में टूट जारी है। सबसे पहले नगरपालिकाओं में पार्षदों ने खुलकर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इसके बाद इस्तीफों का दौर शुरू हुआ, जो अब सांसद स्तर तक जारी है।

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Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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