
क्या PM को CJI पर भरोसा नहीं? चुनाव सुधार पर चर्चा के बीच क्यों बोले राहुल गांधी; पूछे तीन सवाल
Debate on Electoral Reforms: राहुल गांधी ने कहा कि वह विपक्ष के नेता के तौर पर चुनाव आयुक्तों का चयन करने वाली समिति का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि वहां उनकी कोई आवाज़ नहीं है क्योंकि उनके पास संख्या कम है।
Debate on Electoral Reforms: लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान विरोधी दल के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को ‘वोट चोरी’ को सबसे बड़ा राष्ट्र विरोधी कृत्य करार दिया और आरोप लगाया कि सत्तापक्ष में बैठे लोग इस कृत्य को अंजाम दे रहे हैं और ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ (भारत की अवधारणा) नष्ट कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निर्वाचन आयोग तथा दूसरी संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव से एक महीने पहले सभी राजनीतिक दलों को मशीन से पढ़ने योग्य मतदाता सूची उपलब्ध कराई, मतदान के समय की सीसीटीवी फुटेज दी जाए और ईवीएम संरचना के बारे में जानकारी दी जाए।
राहुल ने कहा कि वर्ष 2023 के उस कानून को बदलिए जो निर्वाचन आयुक्तों को ‘‘यह ताकत देता है कि वो जो चाहें वो करें।’’ इसके साथ ही उन्होंने केंद्र पर निशाना साधा और नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल किया कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों को चुनने वाले पैनल से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को हटाने पर इतनी आमादा क्यों है। उन्होंने दो टूक कहा, “CJI को सिलेक्शन पैनल से क्यों हटाया गया? क्या CJI पर भरोसा नहीं है?”
CJI को चयन समिति से क्यों हटाया गया?
राहुल गांधी ने कहा कि वह विपक्ष के नेता के तौर पर चुनाव आयुक्तों का चयन करने वाली समिति का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि वहां उनकी कोई आवाज़ नहीं है क्योंकि उनके पास संख्या कम है। उन्होंने कहा कि उस समिति में एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी हैं और दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं, तो उनके विरोध की आवाज वहां गौण है। उन्होंने कहा, "CJI को सिलेक्शन पैनल से क्यों हटाया गया? क्या इसका मकसद यही था कि उस कमरे में मेरी कोई आवाज़ नहीं रह पाए।"
चुनाव आयुक्तों को सजा से छूट का प्रावधान क्यों?
दरअसल, राहुल गांधी 2023 के उस कानून का जिक्र कर रहे थे, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की जगह एक केंद्रीय मंत्री को तीन सदस्यों वाली समिति में शामिल किया गया है। यह समिति राष्ट्रपति को नाम की सिफारिश करती है, जिसे वह मंजूर करते हैं। अगले सवाल की चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने पूछा कि यह पक्का करने के लिए दूसरा कानून क्यों पास किया गया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को उनकी ऑफिशियल कैपेसिटी में किए गए कामों के लिए सज़ा न दी जा सके।
वह चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे इलेक्शन कमिश्नर्स (अपॉइंटमेंट, कंडीशंस ऑफ सर्विस एंड टर्म ऑफ ऑफिस) एक्ट, 2023 के क्लॉज 16 का ज़िक्र कर रहे थे, जो CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को पद पर रहते हुए लिए गए फैसलों से होने वाले किसी भी एक्शन से सुरक्षा देता है। इसके बाद उन्होंने पूछा कि पोल बॉडी चीफ को कंट्रोल करने का क्या नतीजा निकला, यह दावा करते हुए कि चुनाव की तारीखें प्राइम मिनिस्टर के शेड्यूल के हिसाब से तय की जाती हैं।
सीसीटीवी फुटेज डिलीशन क्यों?
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव सुधार जरूरी हैं, इसलिए मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट सभी राजनीतिक दलों को चुनाव से एक महीने पहले दी जानी चाहिए। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज डिस्ट्रॉय करने का नियम बदलने की भी मांग की और कहा कि हमें ईवीएम देखने के लिए दी जाए। राहुल ने कहा कि वोट चोरी राष्ट्र विरोधी काम है। हम महान लोकतंत्र हैं, जहां इसकी गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव सुधार नहीं चाहती है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालयों, जांच एजेंसियों और निर्वाचन आयोग पर कब्जा कर लिया गया है। (एजेंसी इनपुट्स के साथ)





