Hindi NewsIndia NewsWhy Oxford University Apologises Over Content On Shivaji Maharaj In Book Published In 2003
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने शिवाजी महाराज पर क्या छाप दिया? दो दशक बाद अब मांगी माफी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने शिवाजी महाराज पर क्या छाप दिया? दो दशक बाद अब मांगी माफी

संक्षेप:

इस पुस्तक ने विवाद को जन्म दिया था, जब जनवरी 2004 में संभाजी ब्रिगेड के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पुणे के लॉ कॉलेज रोड स्थित प्रसिद्ध भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बोरी) में तोड़फोड़ की थी।

Jan 07, 2026 09:21 am ISTAmit Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज उदयनराजे भोसले और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह माफी 2003 में प्रकाशित किताब शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया में कुछ असत्यापित बयानों को लेकर मांगी गई है।

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एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक सार्वजनिक सूचना में ओयूपी इंडिया ने स्वीकार किया कि 2003 में प्रकाशित पुस्तक- शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया के पृष्ठ 31, 33, 34 और 93 पर दिए गए कुछ कथन अप्रमाणित थे।

अमेरिकी लेखक जेम्स लेन द्वारा लिखित इस पुस्तक ने विवाद को जन्म दिया था, जब जनवरी 2004 में संभाजी ब्रिगेड के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पुणे के लॉ कॉलेज रोड स्थित प्रसिद्ध भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बोरी) में तोड़फोड़ की थी। उनका आरोप था कि इस संस्थान ने लेखक की मदद की थी, जिसने कथित तौर पर पुस्तक में शिवाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।

नोटिस में प्रकाशक ने उन बयानों के प्रकाशन पर खेद व्यक्त किया और छत्रपति उदयनराजे भोसले और आम जनता से "किसी भी प्रकार की पीड़ा और दुख" के लिए माफी मांगी। नोटिस में कहा गया है कि यह माफीनामा ओयूपी के पूर्व प्रबंध निदेशक सईद मंजर खान की ओर से जारी किया गया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच के निर्देश पर OUP इंडिया ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस जारी कर माफी मांगी। नोटिस में पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर सईद मंजर खान की ओर से कहा गया है कि वे इन बयानों के प्रकाशन पर खेद व्यक्त करते हैं और उदयनराजे भोसले तथा आम जनता को हुई किसी भी पीड़ा या मानसिक आघात के लिए माफी मांगते हैं। OUP ने स्पष्ट किया कि किताब में दिए गए ये बयान सत्यापित नहीं थे और उनके प्रकाशन से हुई असुविधा के लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था और हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह माफी जारी की गई।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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