
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने शिवाजी महाराज पर क्या छाप दिया? दो दशक बाद अब मांगी माफी
इस पुस्तक ने विवाद को जन्म दिया था, जब जनवरी 2004 में संभाजी ब्रिगेड के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पुणे के लॉ कॉलेज रोड स्थित प्रसिद्ध भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बोरी) में तोड़फोड़ की थी।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज उदयनराजे भोसले और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह माफी 2003 में प्रकाशित किताब शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया में कुछ असत्यापित बयानों को लेकर मांगी गई है।
एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक सार्वजनिक सूचना में ओयूपी इंडिया ने स्वीकार किया कि 2003 में प्रकाशित पुस्तक- शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया के पृष्ठ 31, 33, 34 और 93 पर दिए गए कुछ कथन अप्रमाणित थे।
अमेरिकी लेखक जेम्स लेन द्वारा लिखित इस पुस्तक ने विवाद को जन्म दिया था, जब जनवरी 2004 में संभाजी ब्रिगेड के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पुणे के लॉ कॉलेज रोड स्थित प्रसिद्ध भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बोरी) में तोड़फोड़ की थी। उनका आरोप था कि इस संस्थान ने लेखक की मदद की थी, जिसने कथित तौर पर पुस्तक में शिवाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
नोटिस में प्रकाशक ने उन बयानों के प्रकाशन पर खेद व्यक्त किया और छत्रपति उदयनराजे भोसले और आम जनता से "किसी भी प्रकार की पीड़ा और दुख" के लिए माफी मांगी। नोटिस में कहा गया है कि यह माफीनामा ओयूपी के पूर्व प्रबंध निदेशक सईद मंजर खान की ओर से जारी किया गया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच के निर्देश पर OUP इंडिया ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस जारी कर माफी मांगी। नोटिस में पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर सईद मंजर खान की ओर से कहा गया है कि वे इन बयानों के प्रकाशन पर खेद व्यक्त करते हैं और उदयनराजे भोसले तथा आम जनता को हुई किसी भी पीड़ा या मानसिक आघात के लिए माफी मांगते हैं। OUP ने स्पष्ट किया कि किताब में दिए गए ये बयान सत्यापित नहीं थे और उनके प्रकाशन से हुई असुविधा के लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था और हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह माफी जारी की गई।

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