मुस्लिमों को क्यों दे रहे OBC आरक्षण? चुनावों से पहले BJP MP ने उठाई ऐसी मांग; संसद में होने लगा हंगामा

Pramod Praveen वार्ता, नई दिल्ली
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शून्य काल के दौरान मामला उठाते हुए BJP MP कहा कि पश्चिम बंगाल, केरल तमिलनाडु और कर्नाटक में मुस्लिमों को OBC के तहत आरक्षण दिया जा रहा है जो सामाजिक न्याय तथा संविधान के तहत ओबीसी समुदाय को दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है।

मुस्लिमों को क्यों दे रहे OBC आरक्षण? चुनावों से पहले BJP MP ने उठाई ऐसी मांग; संसद में होने लगा हंगामा

चुनावी राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कर्नाटक में भी मुस्लिमों को मिल रहे ओबीसी आरक्षण पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सवाल खड़े किए हैं। भाजपा के सांसद डॉक्टर के. लक्ष्मण ने सोमवार को राज्यसभा में इन चारों राज्यों का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां आखिर मुस्लिम समुदाय की जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आरक्षण कैसे दिया जा रहा है। लक्ष्मण ने मुस्लिमों को आरक्षण देने का विरोध करते हुए इसकी समीक्षा करने की मांग की। वहीं विपक्षी सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

दरअसल, भाजपा सांसद डॉ. के. लक्ष्मण ने शून्य काल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में मुस्लिम समुदाय की जातियों को ओबीसी के तहत आरक्षण दिया जा रहा है जो सामाजिक न्याय तथा संविधान के तहत ओबीसी समुदाय को दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई है और यह सामाजिक न्याय के अनुरूप नहीं है। इसलिए वह सरकार से इसकी समीक्षा करने की मांग करते हैं। बता दें कि डॉ. के लक्ष्मण भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश से राज्सयभा सांसद हैं।

कांग्रेस सहित विपक्ष के अनेक दलों ने इसका विरोध करते हुए सदन में हंगामा किया। सभापति ने विपक्ष के सदस्यों को इस पर बोलने की अनुमति नहीं दी इसके विरोध में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर गए। इसके बाद नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि इंडी गठबंधन के नेताओं की बहस या संसदीय परंपराओं में कोई रुचि नहीं है और यह संसद के नियमों को नहीं मानते। उन्होंने कहा कि जब डॉ. लक्ष्मण एक उचित विषय उठा रहे थे तो विपक्ष के सदस्यों ने लगातार प्रावधान पैदा किया।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मुस्लिम समुदाय को आरक्षण की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय इस तरह के आरक्षण को पहले ही रद्द कर चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष की रुचि बहस में नहीं बहिर्गमन में ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा कि वह विपक्ष की इस सोच की कड़ी निंदा करते हैं।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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