इसरो से लगातार क्यों आ रहे इस्तीफे, क्या रुक जाएगा गगनयान मिशन? सरकार का आया जवाब
इसरो से वैज्ञानिकों के इस्तीफे और कुडनकुलम डेटा लीक विवाद पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बड़ा बयान दिया है। जानें क्या कड़े नियमों के बाद गगनयान मिशन पर कोई असर पड़ेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से वैज्ञानिकों के इस्तीफे और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) में डेटा लीक की खबरों पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने अंतरिक्ष एजेंसी में लगातार हो रहे बदलावों और गगनयान जैसे अहम मिशनों के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के विस्तार से जवाब दिए हैं।
इसरो के बड़े मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने साथ छोड़ा है। सूत्रों के अनुसार साल के शुरू में लांच व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) प्रोजेक्ट डायेक्टर विक्टर जोफेफ इस्तीफा देकर निजी क्षेत्र में चले। वहीं चंद्रयान-3 से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली ने भी इसरो छोड़ा है। सूत्रों की मानें तो चंद्रयान मिशन से जुड़े इसरो के केंद्र विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से 20 से भी अधिक वैज्ञानिक इस्तीफा दे चुके हैं। जबकि यूआर राव सेटेलाइट सेंटर से 80 से भी अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफे आए हैं। हालांकि ये सभी अभी स्वीकृत नहीं हुए हैं।
'कई आते हैं, कई जाते हैं...'
हाल ही में अंतरिक्ष विभाग ने इसरो को एक निर्देश जारी किया था। इसके तहत गगनयान यानी भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े 'ग्रुप ए' के वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफे के नियमों को सख्त कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब इसरो से कई वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबरें सामने आई हैं।
दिल्ली में अंतरिक्ष विभाग के मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने इसरो में वैज्ञानिक संकट की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसरो प्रमुख वी नारायणन ने इस संबंध में बयान दिया है कि जितने लोग जाएंगे, उतने ही लोग आएंगे। परियोजना पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सिंह ने उदाहरण दिया कि पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ गगनयान परियोजना पर कार्य कर रहे थे लेकिन अब वे वहां नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गगनयान पर कार्य रुक जाएगा ? दरअसल, केंद्र सरकार ने 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र के दरवाजे निजी क्षेत्र के लिए खोले। तब उपग्रह, लांच व्हीकल के निर्माण और प्रक्षेपित करने की अनुमति निजी क्षेत्र को दी गई।
क्या गगनयान मिशन पर पड़ेगा असर?
इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ का कार्यकाल जनवरी 2025 तक था। उनके नेतृत्व में ही भारत ने चंद्रयान-3 (चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग) और सूर्य मिशन आदित्य-L1 जैसी ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की थीं। अब वह चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप 'अग्निकुल कॉसमॉस' के निदेशक मंडल में बतौर ऑब्जर्वर शामिल हो गए हैं।
भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने पूर्व इसरो चीफ की एक पुरानी बात याद की। उन्होंने बताया, "करीब 10 साल पहले एक शुरुआती बैठक में उन्होंने (सोमनाथ ने) कहा था कि इंसान को अंतरिक्ष में भेजना आसान है, लेकिन उसे सुरक्षित वापस लाना उतना ही मुश्किल है। और यहीं से क्रू मॉड्यूल की शुरुआत हुई थी।"
जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया, "अब सोमनाथ मुख्य भूमिका में नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि गगनयान मिशन रुक गया है। इसरो में काम निरंतरता के साथ होता है। यहां तक कि रिटायर्ड और पूर्व वैज्ञानिक भी परियोजनाओं का अहम हिस्सा बने रहते हैं। वहां की कार्य संस्कृति ही कुछ अलग है।"
ब्रेन- ड्रेन के बड़े कारण
- बेहतर अवसर और वेतन और जीवन
- शोध के लिए अवसर मिलना
- बड़े प्रोजेक्ट पर काम का मौका
- टैक्स में राहत, सामाजिक सुरक्षा
- प्रवास नीति का सरल और सुलभ होना
क्या है प्रतिभा पलायन
ब्रेन-ड्रेन पेशेवर लोगों का पलायन होता है। इसमें विकासशील देशों के लोग वैज्ञानिक, इंजीनियर और शोधकर्ता समेत अन्य पेशेवर लोग शामिल होते हैं। ये लोग अच्छे वेतन, शोध और नए अवसरों के लिए दूसरे देशों का रूख करते हैं। भारत से साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मेडिसिन और आईटी सेक्टर से सबसे अधिक पलायन होता है।
कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट डेटा लीक पर क्या बोले मंत्री?
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (KKNPP) में संवेदनशील डेटा लीक की रिपोर्ट्स को लेकर न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने पहले ही साफ कर दिया है कि किसी भी तरह के संवेदनशील डेटा में कोई सेंधमारी नहीं हुई है। इस मामले पर मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी अहम जानकारी साझा की।
जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुडनकुलम को लेकर मचाया जा रहा शोर वास्तव में रणनीतिक या सामरिक सुविधाओं से जुड़ा नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब कुछ हुआ ही नहीं है, तो समीक्षा की जरूरत क्यों है। इस पूरे मामले की जांच फिलहाल NPCIL और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) मिलकर कर रहे हैं।
क्या है कुडनकुलम की क्षमता
तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम में रूस द्वारा डिजाइन किए गए 1,000 मेगावाट के दो रिएक्टर वर्तमान में संचालित हैं, जबकि चार अन्य इकाइयों का निर्माण कार्य अभी चल रहा है। पूरा होने के बाद, यह 6,000 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा पार्क बन जाएगा।
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