सस्ता क्यों नहीं है E20 पेट्रोल, पंपों पर E10 चुनने का विकल्प क्यों नहीं? सरकार ने दिए हर सवाल के जवाब
E20 Petrol: इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। ब्राजील और अमेरिका समेत कई देश दशकों से इथेनॉल मिश्रण का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में वर्ष 2001 में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू हुआ, जो दो दशकों तक चला।

देशभर के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 ईंधन के बीच चयन का विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा है? इस सवाल और चिंताओं पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय ने कहा है कि भारत में पेट्रोल की कई अलग-अलग ग्रेड्स को बनाए रखना परिचालन और तार्किक रूप से एक बेहद बड़ी चुनौती साबित होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत का E20 की ओर झुकाव वाहन निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और अन्य लोगों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
भारत में इथेनॉल मिश्रण में जल्दबाजी क्यों दिखाई?
इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। ब्राजील और अमेरिका समेत कई देश दशकों से इथेनॉल मिश्रण का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में वर्ष 2001 में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू हुआ, जो दो दशकों तक चला। शुरू करने से पहले ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों से परामर्श किया। यह कहना कि भारत ने इथेनॉल मिश्रण में जल्दबाजी की है, लेकिन यह सही नहीं है।
पेट्रोल चुनने का विकल्प क्यों नहीं?
जब भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का निर्णय लिया तो उद्योग को हर चरण में शामिल किया गया। E20 में उच्च ऑक्टेन रेटिंग, तेज दहन, बेहतर पिकअप, सुचारू त्वरण और स्वच्छ इंजन संचालन की सुविधा मिलती है। कार्बन उत्सर्जन में 40 प्रतिशत की कमी आती है। यह E10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ है। इस क्षमता के निर्माण के बाद मनमाने ढंग से E10 पर वापस लौटते हैं तो निवेशों पर असर पड़ेगा।
शुद्द पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है E20?
सरकार लाभकारी कीमतों पर इथेनॉल खरीदती है ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का कारोबार 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर हो रहा है तो E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक महंगा है। कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 120-130 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो जाती है तो इथेनॉल और भी सस्ता हो जाता है। इसलिए इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य विशेष दिन पेट्रोल को सस्ता करना नहीं है। बल्कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना है।
पुराने वाहनों के मालिकों को चिंतित होना चाहिए?
भारत के इथेनॉल कार्यक्रम के बढ़ने के साथ-साथ गलत जानकारी का प्रसार भी बढ़ा है। कई गुट अनावश्यक भय फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कोई भी दावा वैज्ञानिक प्रमाणों की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। भारत की इथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला देश की सबसे कड़ाई से विनियमित ईंधन आपूर्ति प्रणालियों में से एक है। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली गलत सूचनाओं से गुमराह न हों।
1.97 लाख करोड़ से अधिक की बचत हुई
आंकड़ों के मुताबिक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा की 1.97 लाख करोड़ से अधिक की बचत हुई है। इसके साथ 952 लाख मीट्रिक टन सीओटू उत्सर्जन में कमी आई है। वहीं, किसानों के हाथों में 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि स्थानांतरित की गई है।
पेट्रोल में बीस फीसदी इथेनॉल मिश्रण (E20) कार्यक्रम को लेकर आम उपभोक्ताओं में चिंताएं बनी हुई हैं। इससे जुड़ी भ्रामक सूचनाओं को दूर करते हुए सरकार ने तथ्यों के साथ सवालों के जवाब पेश किए।
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Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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