भारतीयों को बाहर निकालो, भारत की कंपनी बैन कर दो; अमेरिका में इतनी नफरत क्यों?
‘मिस्टर सिंह’ नाम के साथ पोस्टर जारी करना, भारत की कंपनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और अब एच1 बी वीजा पर कड़े नियमों का प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से किया गया है। खास बात है कि इन सभी कदमों से भारतीय खासे प्रभावित हो रहे हैं।

अमेरिका में भारत और भारतीयों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है। पहले नस्लीय टिप्पणी करती हुई तस्वीर सामने आई है। वहीं, अब खबर है कि कुछ सांसदों ने तीन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये कंपनियां जासूसी कर रही हैं और अमेरिकी नागरिकों का डेटा हासिल कर रही हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब देश में एच1 वीजा धारकों के लिए ग्रेस पीरियड खत्म होने का प्रस्ताव लाया गया है।
पहले तीन मामले समझें
नस्लीय टिप्पणी कर दी- अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने एक वीडियो जारी किया था। इस पोस्टर के नीचे लिखा था, 'हमारी सड़कों से दफा हो जाओ, 'मिस्टर सिंह' आपको वाहन चलाना नहीं आता।' खास बात है कि इस वीडियो में ट्रांसफॉर्मर्स फिल्म का कैरेक्टर मेगाट्रॉन नजर आ रहा है और वह एलियंस की रिहाई के बारे में बात कर रहा है। अब अमेरिका में आमतौर पर उन लोगों के एलियंस बोला जाता है, जो दूसरे देश से आते हैं। आगे वह सड़क दुर्घटनाओं दूसरे अपराधों में शामिल रहे ट्रक चालकों हरजिंदर सिंह, राजविंदर कुमार, बेकझान बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह की रिहाई की मांग कर रहा है।
एक और पोस्ट किया गया, जिसमें दाढ़ी वाले व्यक्ति से फिल्म का हीरो कहता है, 'खुद देश छोड़कर चले जाओ, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो।' इन तस्वीरों के खिलाफ अमेरिका में कई संगठन खड़े हो गए हैं और नस्लवादी बयानों की आलोचना कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ते विवाद के बाद विभाग ने इन्हें हटा लिया था।
विभाग ने लिखा, 'अगर आप इस देश में शत्रुतापूर्ण इरादे से कदम रखते हैं, तो यह जान लें कि हम अपनी रक्षा करेंगे। हम अमेरिकी मूल्यों की रक्षा करेंगे। हम अपने देश की रक्षा करेंगे।'
कंपनियों पर जारी है कार्रवाई- तीन अमेरिकी सांसदों ने मंत्री हावर्ड लुटनिक को पत्र लिखा है। इसमें सनकिस्ड ऑर्गेनिक फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड समेत तीन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है, 'भारत में मौजूद कई किराये के साइबर ग्रुप्स ने पंद्रह साल से ज्यादा समय तक अमेरिकी नागरिकों, व्यवसायों और उनकी अगुवाई करने वाले वकीलों के खिलाफ टारगेटेड जासूसी की है।'
इससे पहले अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इनमें पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी, सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृति इंफ्रा इम्पैक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल थीं। अमेरिका ने ये कार्रवाई ईरान के साथ कारोबार के आरोप में की थी। साथ ही आईए शेख, प्रशांत गर्ग और रामचंद्र रांगी तीन भारतीयों को भी निशाने पर लिया था।
वीजा पर भी नजर- अमेरिका में हर कई टेक कंपनियां बड़ी संख्या कर्मचारियों को नौकरी देती हैं। इनमें अधिकांश भारत और चीन से होते हैं। अब प्रस्ताव है कि इस कैटेगरी के वीजा धारकों का ग्रेस पीरियड खत्म कर दिया जाए। दरअसल, इसका मतलब उस समय से है, जो किसी व्यक्ति को अमेरिका में नौकरी गंवाने के बाद मिलता था। यह अवधि 60 दिनों की होती है। अब अगर ग्रेस पीरियड खत्म होता है, तो वीजा धारक को तुरंत ही देश छोड़ना होगा।
खास बात है कि टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक और एलटीआई माइंडट्री जैसी कई कंपनियां बड़े स्तर पर एच1 बी वीजा धारकों को रोजगार देती हैं। इनके अलावा भी कई और बड़ी कंपनियां हैं।
टैरिफ की मार थी ही
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की बहाना देकर भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था। ट्रंप का कहना था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उसकी मदद कर रहा है। वहीं, पीटर नवारो जैसे ट्रंप के कई करीबियों ने भी भारत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।


