ममता बनर्जी को क्यों सता रहा 19 का डर? भतीजे अभिषेक के कतरे पर, खुद आ रहीं दिल्ली

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल! टीएमसी के कई लोकसभा सांसदों के दिल्ली पहुंचने से संसदीय दल में टूट का खतरा मंडराने लगा है। ममता ने भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतर दिए हैं। जानिए क्या है 19 सांसदों का पूरा गणित।

ममता बनर्जी को क्यों सता रहा 19 का डर? भतीजे अभिषेक के कतरे पर, खुद आ रहीं दिल्ली

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों की बगावत का सामना कर रहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी को अब लोकसभा में भी एक बड़ी टूट का डर सताने लगा है। टीएमसी के कई नाराज लोकसभा सांसदों ने दिल्ली में डेरा डाल लिया है। यही वजह है कि ममता बनर्जी को 19 के आंकड़े का डर सता रहा है। क्यों? आइए समझते हैं।

लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं और दल-बदल कानून की कार्रवाई से बचने के लिए कम से कम 19 सांसदों यानी दो-तिहाई के टूटने की जरूरत है। इसी '19' के आंकड़े ने पार्टी आलाकमान की नींद उड़ा दी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में 58 बागी विधायकों जैसी टूट का लोकसभा में दोहराव ना हो, इसे रोकने के लिए पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। उन्होंने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने भतीजे और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पर कतर दिए हैं। इसके साथ ही ममता ने पार्टी संगठन में ऊपर से नीचे तक बड़े बदलाव भी किए हैं।

ममता ने अभिषेक के कैसे कतरे पर?

ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर राष्ट्रीय कार्यसमिति (NWC) की एक अहम बैठक की। इस बैठक में ममता ने राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया है। इसे सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के अधिकारों को कम करने के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदर हो रही इस बगावत की मुख्य वजह डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी का काम करने का तरीका और उनका बढ़ता प्रभाव है। बागी गुट का आरोप है कि अभिषेक शायद ही कभी पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हैं और वह 'सिंडिकेट' के जरिए एक दायरे में रहकर ही काम करते हैं।

दल-बदल कानून से बचने के लिए 19 सांसद जरूरी

लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 19 सांसदों को टूटकर अलग होना होगा। सूत्रों ने बताया कि बंगाल में मौजूद कुछ अन्य सांसद भी अगले हफ्ते तक राष्ट्रीय राजधानी पहुंच सकते हैं। वहीं, 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए खुद ममता बनर्जी 8 जून को अभिषेक और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन के साथ दिल्ली पहुंचने वाली हैं।

दिल्ली में किन सांसदों ने डाला डेरा?

नाराज सांसदों में से एक, कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया पहले से ही दिल्ली में हैं। हालांकि, बताया जा रहा है कि वह अपने किसी बीमार रिश्तेदार से मिलने गए हैं। इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि दो अभिनेता-सांसद भी अगले हफ्ते राजधानी पहुंच सकते हैं।

दूसरी ओर, बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने शुक्रवार को पार्टी आलाकमान पर अपना निशाना साधना जारी रखा, लेकिन उन्होंने संसदीय दल में टूट की किसी भी भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने कहा, "मैं इन आरोपों को खारिज करती हूं कि मैं संसदीय दल में दरार पैदा करने या अन्य सांसदों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हूं। मैं कोलकाता में हूं और दिल्ली नहीं गई हूं।"

किस सांसद का क्या है रुख?

ये सांसद रहे मौजूद: कालीघाट की बैठक में चार लोकसभा सांसद- अभिषेक बनर्जी, सुदीप बंद्योपाध्याय, कल्याण बनर्जी और माला रॉय शामिल हुए।

ममता के समर्थन में कौन: कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा और दमदम के सांसद सौगत रॉय बैठक में मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्होंने और बर्धमान-दुर्गापुर के सांसद कीर्ति आजाद ने ममता बनर्जी को अपना पूरा समर्थन दिया है।

बीजेपी पर हमला: सांसद सौगत रॉय ने कहा, "ऑपरेशन लोटस बीजेपी की राजनीति है। वे पैसे और धमकियों का इस्तेमाल करके पार्टियों को तोड़ने की कोशिश करते हैं। महाराष्ट्र और बिहार में उन्होंने ऐसा ही किया है। हमें इसका सामना करना होगा। शुरुआत में यह थोड़ा निराशाजनक लगेगा, लेकिन अगर हम डटे रहे, तो इसके असर को कम किया जा सकता है।"

पार्टी के साथ रहने का दावा

मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान ने कहा, "कंट्रोल किसी के भी हाथ में हो, मैं पार्टी लाइन पर चलूंगा और वही करूंगा जो पार्टी मुझसे कहेगी।" विधानसभा में पार्टी तोड़ने वाले और अब नेता प्रतिपक्ष बन चुके निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पिछले सात दिनों में किसी सांसद से बात नहीं की है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से उन्होंने कहा, "कोई नहीं कह सकता कि कल क्या होगा। थोड़ा धैर्य रखें।"

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Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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