
अब दूतावास जाने की जरूरत नहीं, क्यों भारत ने चीनी नागरिकों के लिए लॉन्च किया खास वीजा?
चीन ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने वाला बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीजा भारतीय कंपनियों को चीनी तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने में मदद करेगा।
भारत ने चीनी नागरिकों के लिए व्यापारिक यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से एक नया ई-बिजनेस वीजा शुरू किया है। इसे ई-प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिजनेस वीजा (e-B-4 वीजा) नाम दिया गया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है। यह कदम भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर जारी ताजा एडवाइजरी के अनुसार, यह वीजा चीनी व्यवसायियों को भारत में विशिष्ट व्यापारिक गतिविधियों के लिए यात्रा करने की सुविधा प्रदान करेगा। इसमें उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग, गुणवत्ता जांच, आवश्यक रखरखाव, उत्पादन कार्य, आईटी और ईआरपी रैंप-अप, प्रशिक्षण, सप्लाई चेन विकास, वेंडर पैनलिंग, प्लांट डिजाइन और सीनियर मैनेजमेंट की यात्रा शामिल है।
आवेदन प्रक्रिया और सुविधाएं
ऑनलाइन आवेदन: आवेदक https://indianvisaonline.gov.in पोर्टल पर 'For e-Visa by Bureau of Immigration टैब के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया जा सकता है। दूतावास या एजेंट के पास जाने की जरूरत नहीं है।
भारतीय कंपनियों के लिए: चीनी नागरिकों को आमंत्रित करने वाली भारतीय कंपनियां DPIIT के नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) पोर्टल https://www.nsws.gov.in पर 'Business User Login' के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं।
वीजा अवधि और वैधता: यह वीजा भारत में अधिकतम छह महीने की रहने की अनुमति देता है। प्रोसेसिंग समय लगभग 45-50 दिन है।
उद्देश्य: बढ़ती व्यापारिक मांग को देखते हुए यह वीजा शुरू किया गया है, जो उत्पादन और निवेश से जुड़ी गतिविधियों को सुगम बनाएगा।
भारत-चीन संबंध
हाल के महीनों में भारत और चीन ने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई जन-केंद्रित कदम उठाए हैं। अगस्त 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने सीमा विवाद के समाधान और लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी। इस नए वीजा की शुरुआत को इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
चीन ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने वाला बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीजा भारतीय कंपनियों को चीनी तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने में मदद करेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां चीनी मशीनरी और उपकरणों का उपयोग होता है। यह पहल भारत की 'मेक इन इंडिया' और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं को भी मजबूती प्रदान करेगी। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने की उम्मीद है, जो वैश्विक सप्लाई चैन में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।





