बांग्लादेश चुनाव में भारत ने नहीं भेजे पर्यवेक्षक, नतीजों को लेकर बताया प्लान
299 सीटों में से 174 निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना पूरी हो चुकी है। वहीं, 125 अभी बाकी हैं। बीएनपी और गठबंधन 135 पर आगे चल रहा है। वहीं, जमात और गठबंधन 34 पर आगे है। इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश 1 सीट पर आगे है। अन्य 4 पर बढ़त बनाए हुए है।
बांग्लादेश चुनाव पर भारत की पैनी नजर बनी हुई है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने बताया है कि पड़ोसी मुल्क के निमंत्रण के बाद भी भारत की तरफ से पर्यवेक्षक नहीं भेजे गए थे। साथ ही सरकार ने इसकी वजह भी बताई है। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि तारिक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और गठबंधन के साथ चुनाव में आगे चल रहे हैं।
भारत ने क्यों नहीं भेजे पर्यवेक्षक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमें पर्यवेक्षक भेजने का निमंत्रण मिला था। हमने बांग्लादेश में अपने पर्यवेक्षकों को नहीं भेजा है।' उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश में चुनाव हे रहा है। हमें चुनाव परिणामों का इंतजार करना चाहिए ताकि पता चल सके कि किस तरह का जनादेश आया है...और उसके बाद हम सामने आने वाले मुद्दों पर विचार करेंगे। चुनाव के संबंध में, आप जानते हैं कि हमारा रुख क्या रहा है। हम बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनावों के पक्षधर हैं।'
करीब 81 स्थानीय संगठनों के 55,454 पर्यवेक्षकों ने चुनाव की निगरानी की, जबकि विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों की संख्या 394 रही। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों में से 80 अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरफ से हैं, जबकि बाकी अलग-अलग देशों से हैं, जिनमें स्वतंत्र यूरोपीय पर्यवेक्षक भी शामिल हैं।
किसके पक्ष में जा रहा है चुनाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल 299 सीटों में से 174 निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना पूरी हो चुकी है। वहीं, 125 अभी बाकी हैं। बीएनपी और गठबंधन 135 पर आगे चल रहा है। वहीं, जमात और गठबंधन 34 पर आगे है। इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश 1 सीट पर आगे है। अन्य 4 पर बढ़त बनाए हुए है।
बांग्लादेश चुनाव
इस चुनाव में दो पूर्व सहयोगी दलों बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच सीधा मुकाबला है। जनमत सर्वेक्षणों में बीएनपी को मामूली बढ़त दी गई थी। गुरुवार को मुल्क की 300 में से 299 सीटों पर 60 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था। खास बात है कि अगस्त 2024 में हुई हिंसा और शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद पहली बार आम चुनाव हो रहे हैं।
शेख हसीना की पार्टी का नाम ही नहीं
बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की अवामी लीग को पिछले साल भंग कर दिया था और पार्टी के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। बांग्लादेश में 30 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब हसीना की अवामी लीग का चुनाव चिन्ह 'नाव' मतपत्र पर नहीं दिखाई दिया।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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