सालाना किराया सिर्फ 6080! अब लुटियंस दिल्ली के इस पोलो ग्राउंड पर कब्जा क्यों चाहती है सरकार?
दिल्ली जिमखाना के बाद अब लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक 'जयपुर पोलो ग्राउंड' को खाली कराने का सरकारी आदेश जारी हुआ है। सरकार ने इसे अवैध कब्जा बताया है, वहीं हाईकोर्ट ने दिल्ली में खत्म होती हरियाली पर गंभीर चिंता जताई है।

दिल्ली जिमखाना क्लब और दिल्ली रेस क्लब के बाद अब केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली के दिल में स्थित ऐतिहासिक 'जयपुर पोलो ग्राउंड' को खाली करने का नोटिस दिया है। इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) ने इस बेदखली के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है। यह ग्राउंड कमाल अतातुर्क मार्ग पर स्थित है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बेहद करीब है। आइए समझते हैं कि आखिर इतने पुराने पोलो ग्राउंड को खाली कराने की नौबत क्यों आई और क्या है पूरा मामला...
क्या है पूरा विवाद और जमीन का इतिहास?
1930 के आसपास जयपुर के तत्कालीन महाराजा ने यह बेशकीमती जमीन 'दिल्ली पोलो क्लब' को उपहार स्वरूप दी थी। 24 फरवरी 1951 को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने 20 साल के लिए इसे क्लब को औपचारिक रूप से लीज पर दिया था।
इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) के अनुसार, इस लीज को समय-समय पर बढ़ाया गया और 1983 में दिल्ली पोलो क्लब भंग होने के बाद इसका प्रशासन IPA के पास आ गया। इसके लिए 400 रुपये प्रति एकड़ (करीब 6,080 रुपये सालाना) का ग्राउंड रेंट तय हुआ था। IPA का दावा है कि उसने हाल ही में 31 मार्च 2030 तक के पांच वर्षों के लिए 30,400 रुपये का कुल किराया सरकार को अग्रिम रूप से चुका दिया है।
सरकार क्यों करा रही है ग्राउंड खाली?
सरकार का कहना है कि ग्राउंड की लीज 1993 में ही खत्म हो चुकी है और तब से IPA बिना किसी वैध लीज या आधिकारिक अनुमति के इस पर "अवैध रूप से" काबिज है। शहरी और आवास मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 17 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद 20 मई को एस्टेट ऑफिसर की तरफ से बेदखली का सीधा आदेश दे दिया गया।
सरकार की दलील है कि राजधानी के इस अहम और अति-सुरक्षित इलाके की जमीन की जरूरत "बड़े सार्वजनिक उद्देश्य और लाभ" के साथ-साथ रक्षा और सरकारी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए है।
जयपुर पोलो ग्राउंड का ऐतिहासिक महत्व
जयपुर पोलो ग्राउंड दशकों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पोलो इवेंट्स की मेजबानी करता आया है, जिसमें एशियन गेम्स के घुड़सवारी इवेंट्स भी शामिल हैं। IPA के रिकॉर्ड के मुताबिक, 1922 में यहां जोधपुर और पटियाला के बीच हुए एक ऐतिहासिक पोलो मैच को करीब 1.5 लाख लोगों ने देखा था।
बेदखली के इस आदेश से आगामी IPA नेशनल पोलो चैंपियनशिप, बड़ौदा कप, नॉर्दर्न इंडिया पोलो चैंपियनशिप और कैवलरी गोल्ड कप जैसे कई बड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स पर ग्रहण लग गया है।
हाईकोर्ट ने इस कदम पर जताई चिंता
इस पूरे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। IPA की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राजधानी में कम होती हरियाली और खुले मैदानों के खत्म होने पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एनडीएमसी इलाके में जो थोड़ी बहुत हरियाली बची है, अगर उसे भी खत्म कर दिया गया तो "दिल्ली का दम घुट जाएगा और हम सब घुट-घुट कर मरेंगे।" कोर्ट ने फिलहाल संबंधित निचली (पटियाला हाउस) अदालत को बेदखली पर रोक लगाने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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