Explainer: दिल्ली का पारा बढ़ाने आ रहे किसान, ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर क्यों निकल पड़े? शंभू बॉर्डर पर तने तंबू
शंभू बॉर्डर पर किसानों का दिल्ली कूच! भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ 'देश बचाओ मोर्चा' की महापंचायत। बॉर्डर सील, धारा 163 लागू और किसान नेता चढ़ूनी हिरासत में। पढ़ें पल-पल की ताजा जानकारी।

पंजाब से हजारों किसान एक बार फिर दिल्ली कूच की तैयारी में शंभू और खनौरी बॉर्डर पर इकट्ठा हो गए हैं। 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले आज (21 जुलाई) दिल्ली के किसान घाट पर एक विशाल महापंचायत बुलाई गई है। हालांकि, किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है और वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आखिर इस बार किसानों के गुस्से की मुख्य वजह क्या है? आइए आपको समझाते हैं।
आखिर क्यों भड़का है नया किसान आंदोलन? अमेरिका कनेक्शन
इस बार किसानों के विरोध प्रदर्शन के केंद्र में प्रस्तावित 'भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता' है। किसानों और मजदूर संगठनों का दावा है कि अगर यह समझौता लागू होता है, तो देश के कृषि और डेयरी सेक्टर पर इसका बेहद विनाशकारी असर पड़ेगा।
किसान नेताओं का तर्क है कि अमेरिका में कृषि और डेयरी पर सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी दी जाती है। अगर वहां के सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार में उतरेंगे, तो यहां के छोटे और सीमांत किसानों, डेयरी उत्पादकों और छोटे व्यापारियों की पूरी आजीविका संकट में पड़ जाएगी।
डेयरी सेक्टर पर सीधा खतरा?
भारत का डेयरी सेक्टर लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों के भरण-पोषण का साधन है। किसानों का मानना है कि विदेशी उत्पादों की एंट्री से ग्रामीण रोजगार, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और खेती से जुड़े अन्य घरेलू उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी और अन्य संगठनों की मांग है कि इस प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट को तुरंत रद्द किया जाए। साथ ही, सरकार इस समझौते से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे और कोई भी फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा करे।
शंभू बॉर्डर सील, हरियाणा पुलिस की सख्त नाकेबंदी
किसानों के शांतिपूर्ण मार्च को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। शंभू और खनौरी बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है और कई लेयर की मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। बॉर्डर पर पुलिसकर्मी दंगा-रोधी उपकरणों के साथ तैनात हैं। यहां तक कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जेसीबी मशीनें भी लगाई गई हैं। अंबाला प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर धारा 163 लागू कर दी है और प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स से कम से कम 100 मीटर दूर रहने की चेतावनी दी है। हाईवे बंद होने के कारण दिल्ली-जालंधर नेशनल हाईवे का ट्रैफिक अन्य रास्तों पर डाइवर्ट किया गया है, जिससे आम लोगों को खासी परेशानी और जाम का सामना करना पड़ रहा है।
कई किसान नेता हिरासत में
किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह धरपकड़ भी शुरू कर दी है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को हरियाणा के कुरुक्षेत्र (पेहोवा के पास) में हिरासत में ले लिया गया है। इसके विरोध में किसानों ने कई जगह टोल प्लाजा पर धरना शुरू कर दिया है।
क्या है किसानों की आगे की रणनीति?
किसान नेता सरवण सिंह पंढेर ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते हैं और प्रशासन के साथ कोई टकराव नहीं चाहते। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें बॉर्डर पर ही रोका गया, तो वे पीछे हटने के बजाय वहीं पक्का मोर्चा लगाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। इस महापंचायत में पंजाब, हरियाणा के अलावा राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा समेत कई राज्यों के किसानों के शामिल होने की उम्मीद है।
किसान घाट पर 'किसान महापंचायत' करने की योजना
पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। घग्गर नदी पर बने पुल पर अवरोधक लगाए गए हैं और सीमेंट के ब्लॉक रखकर किसानों की आवाजाही रोकने के इंतजाम किए गए हैं। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय 'किसान महापंचायत' आयोजित करने की योजना है। बता दें कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के समाधि स्थल को किसान घाट के नाम से जाना जाता है। यह समाधि स्थल नई दिल्ली में राजघाट के निकट यमुना नदी के किनारे स्थित है।
किसान नेताओं ने पहले ही कहा था कि पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में किसान इस महापंचायत में भाग लेंगे। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से किसान बसों के जरिए दिल्ली जाने की तैयारी कर चुके हैं। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में पंढेर ने संवाददाताओं से कहा कि किसान शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक रही है।
किसानों का काफिला मंगलवार सुबह गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब से रवाना हुआ। एक हजार से अधिक किसानों ने सोमवार रात गुरुद्वारे की सराय में बिताई। गुरुद्वारे से रवाना होने के बाद काफिला जीटी रोड पर सरहिंद के निकट माधोपुर पहुंचा और वहां से शंभू बॉर्डर की ओर बढ़ा।
इससे पहले सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को पुलिस ने कुरुक्षेत्र में उस समय हिरासत में ले लिया था, जब वह महापंचायत में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे। किसानों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करने तथा किसानों और आम लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।


