Hindi NewsIndia NewsWhy do we cite foreign examples when we have our own judgments Why did the next CJI Surya Kant say this
जब हमारे पास अपने फैसले, विदेश का क्यों देते हैं उदाहरण? अगले CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा

जब हमारे पास अपने फैसले, विदेश का क्यों देते हैं उदाहरण? अगले CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा

संक्षेप:

उन्होंने जोर दिया कि भौगोलिक, स्थानीय, सामाजिक, और राजनीतिक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण कारक अन्य देशों में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं का न्यायशास्त्र विकसित करने की आवश्यकता है।

Nov 23, 2025 12:02 pm ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वदेशी न्यायशास्त्र को अपनाने की दिशा में बल दिए जाने को एक स्वाभाविक कदम बताया। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों में न्यायालय ने जो मजबूत और आधिकारिक न्याय-निर्णय का संग्रह बनाया है, उसके बाद अब समय आ गया है कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी स्वयं की न्यायिक विचारधारा को गहरा करे।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायपालिका के लिए अपने स्वयं के दर्शन पर निर्भर रहना क्यों आवश्यक है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के हजारों ऐतिहासिक निर्णय देने के 75 वर्षों के बाद जब हमारे निर्णयों को अन्य विभिन्न क्षेत्राधिकारों द्वारा उद्धृत किया जा रहा है और जब हमने अपने दम पर न्यायिक ज्ञान का भंडार अर्जित कर लिया है। हमें अपने देश से संबंधित किसी भी मुद्दे पर राय बनाते समय दूसरे देशों के निर्णयों को क्यों देखना चाहिए?"

उन्होंने जोर दिया कि भौगोलिक, स्थानीय, सामाजिक, और राजनीतिक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण कारक अन्य देशों में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं का न्यायशास्त्र विकसित करने की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि CJI के रूप में उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में लंबी अवधि से लंबित मामलों को निपटाना और संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाना शामिल है। उनकी प्राथमिकता विशेष रूप से सात और नौ न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठों का गठन करना है, ताकि महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सके।

उन्होंने लंबित मामलों की संख्या (90,000 तक) को स्वीकार किया लेकिन वह इसे लेकर आशावादी हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता के साथ दिए गए उनके एक निर्णय में ऐसे निर्देश थे, जिससे अंततः 1,000 मामले निपटाए जा सकेंगे। उनका लक्ष्य लंबित मामलों को शून्य तक लाना नहीं है, लेकिन स्थिति को प्रबंधनीय बनाना है।

उन्होंने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय में सभी रिक्तियों को भरेंगे, हालांकि उन्होंने महिला प्रतिनिधित्व पर अभी विचार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का कर मामलों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण है और 5 करोड़ के लिए मुकदमेबाजी नहीं लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने अंतिम राय बनाने के लिए एक ऐसे तंत्र के विकास की आवश्यकता पर बल दिया जिससे समय बर्बाद न हो।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने CJI कार्यालय से जुड़े दबावों और सोशल मीडिया की आलोचना पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि CJI के पद के लिए व्यक्ति को सोशल मीडिया की टिप्पणियों से अलग रहने की आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा, "न्यायाधीश या CJI दबाव में नहीं आ सकते और नहीं आना चाहिए। मैं कभी दबाव में नहीं रहा। एकमात्र तरीका है कि सोशल मीडिया की टिप्पणियों को अनदेखा करें।"

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha
कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रैजुएट हिमांशु शेखर झा करीब 9 वर्षों से बतौर डिजिटल मीडिया पत्रकार अपनी सेवा दे रहे हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय राजनीति पर अच्छी पकड़ है। दिसंबर 2019 में लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। इससे पहले दैनिक भास्कर, न्यूज-18 और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में भी काम कर चुके हैं। हिमांशु बिहार के दरभंगा जिला के निवासी हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।