आपका मकसद पूरा हुआ, अनशन खत्म करें; सोनम वांगचुक से ऐसा क्यों बोलीं महुआ मोइत्रा
सोनम वांगचुक 17 दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन में आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार उनसे बात नहीं कर रही है। कहा जा रहा है कि विपक्ष के नेता प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की जा रही है। लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि अब इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए। साथ ही आरोप लगाए हैं कि सरकार को वांगचुक की कोई चिंता नहीं है। वह बीते 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनका वजन लगातार गिर रहा है।
महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, 'सोनम सर आपके अनशन ने देश के युवाओं को उनके न्याय के संघर्ष में एकजुट कर दिया है। आपका मकसद पूरा हो गया है। सरकार को आपके जीवन या उन करोड़ों युवाओं की कोई भी चिंता नहीं है। लेकिन आपका जीवन हमारे लिए मायने रखता है। प्लीज अपना अनशन खत्म कर दें और लड़ाई को जारी रखें।'
उद्धव ठाकरे ने भी की अपील
सोमवार को मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में ठाकरे ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए। साथ ही उन्होंने वांगचुक से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि उनका जीवन बेहद कीमती है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संसद के मॉनसून सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को उठाएंगे।
तेजी से गिर रहा वजन
सोमवार को CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने बताया कि वांगचुक का 8.2 किलोग्राम वजन घट चुका है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने यह कहते हुए केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की कि 'लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी हैं।' वह लगातार 17 दिनों से अनशन पर बैठे हैं।
सीजेपी की ओर से जारी स्वास्थ्य सूचना के मुताबिक, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से वांगचुक का कुल वजन 8.2 किलोग्राम कम हो गया है, उनकी ब्लड ग्लूकोज का स्तर गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया है और उनका रक्तचाप 107/70 एमएमएचजी दर्ज किया गया।
बीते 24 दिनों से सीजेपी का प्रदर्शन लगातार चल रहा है। दीपके ने सवाल उठाया कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की बिगड़ती सेहत के बावजूद सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत क्यों शुरू नहीं की। उन्होंने कहा, 'मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि वह इसे अहंकार की लड़ाई न बनाए, क्योंकि यहां इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं।'
उन्होंने कहा, 'अपनी गलती मानना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह परिपक्वता, जवाबदेही और अपनी गलती सुधारने की इच्छा का संकेत है। हम बस जवाबदेही चाहते हैं।' दीपके ने आरोप लगाया कि वांगचुक की बिगड़ती हालत के बावजूद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोई पहल नहीं की।
उन्होंने कहा, 'यह कैसी सरकार है? सोनम वांगचुक इसी देश के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने काम से भारत को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। आज वह देश के विद्यार्थियों के लिए लड़ रहे हैं, फिर भी सरकार ने उनसे बात करने के लिए किसी मंत्री या प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजा है। सरकार की यह पूरी तरह से बेरुखी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।'
अन्ना हजारे से तुलना
साल 2011 में हुए अन्ना हजार के 12 दिनों के अनशन से भी इसकी तुलना की जा रही है। हज़ारे ने सबसे पहले पांच अप्रैल 2011 को भूख हड़ताल शुरू की थी और चार दिन बाद इसे खत्म कर दिया था, जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई थी। अगस्त 2011 में हजारे ने एक बार फिर भूख हड़ताल शुरू की जो 12 दिनों तक चली।
विपक्ष के नेता हो सकते हैं शामिल
उन्होंने कहा कि उन लोगों ने वांगचुक से कई बार अपना अनशन खत्म करने की अपील की थी, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ता ने तब तक पीछे हटने से इनकार कर दिया है जब तक सरकार उनकी मांगें मान नहीं लेती। दीपके ने यह भी कहा कि संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च में कई विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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