कौन हैं चीन की ये 4 कंपनियां, सरकार ने क्यों दी टेंडर भरने की छूट? गलवान संघर्ष के बाद लगी थी रोक
भारतीय बिजली उद्योग के लिए चीनी तकनीक और विशेषज्ञता कितनी जरूरी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल घरेलू उद्योग ने चीनी तकनीशियनों के लिए वीजा नियमों में ढील देने की मांग की थी।

भारत-चीन सीमा विवाद और सख्त नियमों के बीच केंद्र सरकार ने देश के पावर सेक्टर को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भारत में अपनी फैक्ट्रियां चला रहीं चार चीनी बिजली उपकरण निर्माता कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं के सरकारी टेंडर में भाग लेने की अनुमति दे दी है। इन चारों चीनी कंपनियों में टीबीईए एनर्जी, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया शामिल हैं। इन्हें सार्वजनिक खरीद नियमों के कड़े प्रावधानों से छूट दी गई है।
आपको बता दें कि इन नियमों के तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए किसी भी सरकारी टेंडर या खरीद प्रक्रिया में बोली लगाने के लिए संबंधित भारतीय प्राधिकरण के साथ रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य था।
दो साल के लिए मिली छूट
वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग द्वारा 24 जून को जारी इस आदेश में साफ किया गया है कि यह छूट केवल दो साल की अवधि के लिए ही वैध होगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस फैसले को अन्य कंपनियों के लिए एक मिसाल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दरअसल, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इसी साल जनवरी में महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं की गति को बनाए रखने के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने वाली कुछ चुनिंदा संस्थाओं को यह छूट देने की सिफारिश की थी।
गलवान संघर्ष के बाद लगाए गए थे कड़े प्रतिबंध
साल 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद भारत सरकार ने चीनी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके तहत किसी भी चीनी कंपनी के लिए भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनिवार्य राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी लेना आवश्यक कर दिया गया था।
पावर सेक्टर की इन चार कंपनियों को दी गई यह मंजूरी सरकार द्वारा एफडीआई नीति में किए गए बदलावों के ठीक तीन महीने बाद आई है। इससे पहले सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के चीनी टेकओवर को रोकने के लिए प्रेस नोट 3 लागू किया था, जिसके तहत सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये चार कंपनियां?
जिन चार कंपनियों को यह विशेष छूट मिली है, वे बिजली ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले बेहद महत्वपूर्ण उपकरणों जैसे ट्रांसफार्मर, हाई-वोल्टेज स्विच गियर, तार और गैस-इंसुलेटेड स्विच गियर का निर्माण भारत में ही करती हैं। न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक, यह कंपनी देश भर में कम से कम 11 ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं पर काम कर रही है।
आपको बता दें कि साल 2000 की शुरुआत से ही चीनी कंपनियों ने भारत के तेजी से बढ़ते बिजली क्षेत्र में गहरी पैठ बना ली थी। चीन की तीन प्रमुख कंपनियों चीन डोंगफेंग इलेक्ट्रिक ग्रुप, शंघाई इलेक्ट्रिक ग्रुप और हार्विन इलेक्ट्रिक ग्रुप ने थर्मल पावर प्लांट के उपकरणों के मामले में भारतीय बाजार पर बड़ा कब्जा जमाया था।
भारतीय बिजली उद्योग के लिए चीनी तकनीक और विशेषज्ञता कितनी जरूरी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल घरेलू उद्योग ने चीनी तकनीशियनों के लिए वीजा नियमों में ढील देने की मांग की थी। विशेषज्ञों की कमी के कारण कई ट्रांसमिशन और जेनरेशन प्रोजेक्ट्स अधर में लटके हुए थे।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
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