मणिपुर के डिप्टी सीएम पर क्यों हो गया बवाल, कुकी समुदाय ने किया विधायकों का बहिष्कार

Feb 06, 2026 10:30 am ISTAnkit Ojha भाषा
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मणिपुर में नई सरकार के गठन के बाद एक बार फिर तनाव व्याप्त हो गया है। कुकी समुदाय इस नई सरकार का विरोध कर रहा है। वहीं इस समुदाय ने सरकार मेंशामिल तीन कुकी विधायकों का बहिष्कार कर दिया है। 

मणिपुर के डिप्टी सीएम पर क्यों हो गया बवाल, कुकी समुदाय ने किया विधायकों का बहिष्कार

मणिपुर में नई सरकार बनते ही चुराचांदपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई। जानकारी के मुताबिक तुइबोंग इलाके में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और नई सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों ने आग जलाकर प्रदर्शन किए। भीड़ को नियंत्रण करे के प्रयास में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों में झड़प हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई है।

उपमुख्यमंत्री का हो रहा था विरोध

यह झड़प समुदाय के एक विधायक नेमचा किपगेन के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल होने के विरोध में हुई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी तुइबोंग बाजार के पास जमा हुए और टायर जलाकर किपगेन के खिलाफ नारे लगाए। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति तब और बिगड़ गई जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया। वहां तैनात कर्मियों की तुलना में भीड़ की संख्या अधिक थी और उन्होंने पथराव किया जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि इस घटना में दो लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त बलों को भेजा गया है।" कांगपोकपी के रहने वाले किपगेन के बुधवार शाम को उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से जिले में तनाव व्याप्त है।

कुकी समुदाय ने कर दी बहिष्कार की घोषणा

मणिपुर सरकार में तीन कुकी-जो विधायकों के शामिल होने के बाद एक संगठन ने उन पर समुदाय के साथ विश्वासघात करने और मेइती समुदाय के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाते हुए उनके सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की। कई समूहों ने कुकी बहुल चूड़ाचांदपुर जिले में शुक्रवार को 'पूर्ण बंद' का आह्वान भी किया। मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसके चलते पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।

कुकी-जो समुदाय के नेताओं द्वारा समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यह पदभार भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लगभग एक वर्ष बाद संभाला। कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट की विधायक एल. दिखो ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। विधानसभा में कुकी-जो समुदाय के कुल 10 विधायक हैं, जिनमें से सात भाजपा से हैं।

हमार जनजाति के विधायक एन. सनाते, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया। इस दल में कुकी-जो जनजाति के एक अन्य विधायक, एल. एम. खौते भी शामिल थे। हमारे लोग कुकी-जो समुदाय का हिस्सा हैं।

कुकी जो परिषद (केजेडसी) ने गुरुवार को एक बयान में मणिपुर सरकार के गठन में कुछ कुकी-जो विधायकों की भागीदारी की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए कहा कि यह 13 जनवरी 2026 के लुंगथू प्रस्ताव का घोर उल्लंघन है।प्रस्ताव के अनुसार, कुकी-जो समुदाय के सदस्य सरकार गठन में तभी भाग लेंगे जब केंद्र और राज्य के अधिकारियों से लिखित आश्वासन प्राप्त होगा कि एक विधायिका के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में एक अलग प्रशासन होगा।

इसमें कहा गया है कि सरकार में शामिल होकर, इन कुकी विधायकों ने प्रभावी रूप से खुद को मेइती लोगों के साथ जोड़ लिया है और उन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है। संगठन ने बयान में कहा, ''केजेडसी मणिपुर सरकार के गठन में भाग लेने वाले सभी कुकी-जो विधायकों की निंदा करता है और कुकी-जो के सभी क्षेत्रों में उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करता है।''

संगठन ने कुकी-जो लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी सामाजिक, पारंपरिक या सार्वजनिक मामले में उनके साथ सहयोग या संबंध न रखें। संगठन ने कहा कि यह बहिष्कार तब तक लागू रहेगा जब तक वे कुकी-जो लोगों के सामूहिक रुख के अनुरूप स्वयं को स्थापित नहीं कर लेते। कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है।

बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया। कुकी लिबरेशन आर्मी (लेटखोलुन) ने एक बयान में कहा कि वह एक "स्पष्ट और अंतिम चेतावनी" जारी कर रही है। संगठन ने कहा कि कोई भी कुकी-जो प्रतिनिधि, जो सरकार के गठन में भाग लेने का फैसला करता है, उसे समुदाय के लोगों के साथ विश्वासघात करने वाला माना जाएगा।

बयान में कहा, ''ऐसे किसी भी कदम के चलते अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन कुकी-जो विधायकों पर ही होगी।'' मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसकी शुरुआत पहाड़ी जिलों में निकाली गई एक आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी। यह रैली बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई थी। हिंसा में अब तक कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों तथा सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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