CM स्टालिन ने Ex CM OPS को क्यों कराया DMK में शामिल, किस पद का दिया ऑफर? इनसाइड स्टोरी
Tamilnadu Politics: ओ पनीरसेल्वम जिन्हें दोस्त और दुश्मन OPS कहते हैं, शुक्रवार को चेन्नई में DMK के हेडक्वार्टर अन्ना अरिवालयम में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और DMK के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए।

Tamilnadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में आज (शुक्रवार, 27 फरवरी) को एक अहम बदलाव देखने को मिला, जब एक समय AIADMK की दिग्गज नेता जयललिता के विश्वासपात्र रहे ओ पनीरसेल्वम (OPS) राज्य के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की मौजूदगी में उनकी सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) में शामिल हो गए। यह कदम न केवल उनके राजनीतिक जीवन के लिए निर्णायक है, बल्कि राज्य की आगामी चुनावी राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। पनीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 2022 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) से निष्कासित किए जाने से पहले वह पार्टी के शीर्ष पदों पर भी रह चुके थे।
वफादारी से विद्रोह तक की यात्रा
OPS लंबे समय तक दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के विश्वसनीय सहयोगी रहे। 2016 में उनके निधन के बाद, उन्होंने शुरुआत में वीके शशिकला को सत्ता सौंपने का संकेत दिया, लेकिन जब शशिकला ने उनके खिलाफ साजिश की तो पनीरसेल्वम ने अचानक विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह ने उनके राजनीतिक समीकरण को बदल दिया। यह विद्रोह उनके स्वतंत्र अस्तित्व की शुरुआत तो बना, लेकिन धीरे-धीरे उनका सियासी प्रभाव सिमटता चला गया। दूसरी तरफ, इस दौरान उनके विरोधी एडप्पडी के. पलानीस्वामी (EPS) ने AIADMK और सरकार पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और OPS हाशिए पर चले गए।
सीमित विकल्प और बड़ा फैसला
2024 के चुनाव में मनमाफिक सफलता नहीं मिलने के बाद OPS के सामने अब सीमित विकल्प बचे थे। उनके पास पहला विकल्प अभिनेता से राजनेता बने विजय की नई पार्टी के साथ जाना था, जो अभी तक परखी नहीं गई है। दूसरा विकल्प मजबूत नेतृत्व वाली DMK थी, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन कर रहे हैं। इस बीच ओपीएस ने DMK में शामिल होकर राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संदेशों के संकेत दे दिए हैं।
स्पीकर पद का ऑफर
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राजनीतिक हलकों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने OPS को ऑफर दिया है कि अगर पार्टी दोबारा सत्ता में आती है तो उन्हें नई तमिलनाडु विधानसभा का स्पीकर बनाया जाएगा। स्पीकर का पद एक पूर्व CM के लिए, सम्मानजनक और स्ट्रेटेजिक दोनों है। एक तरह से यह उन्हें सीधे संवैधानिक दर्जा देता है। OPS के लिए स्टालिन द्वारा इस गरिमापूर्ण पद की पेशकश सम्मानजनक और व्यावहारिक दोनों साबित हुआ।
OPS के आने से DMK को क्या लाभ?
OPS का DMK में आना केवल एक व्यक्ति का दल परिवर्तन नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक कदम है। वे मुकुलथोर (थेवर) समुदाय से आते हैं, जिसका दक्षिण तमिलनाडु में मजबूत प्रभाव है। DMK को इस क्षेत्र में हमेशा चुनौती का सामना करना पड़ा है। ऐसे में OPS DMK में इस कमी को भर सकते हैं। उनके साथ आए सहयोगी विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में DMK की स्थिति और मजबूत कर सकते हैं। 75 साल के ओपीएस मुक्कुलाथोर समुदाय का प्रभावशाली चेहरा हैं और वह अन्नाद्रमुक के कोषाध्यक्ष और पार्टी समन्वयक का शीर्ष पद भी संभाल चुके हैं। वह अपने बेटे पी. रवींद्रनाथ कुमार और समर्थकों के साथ द्रमुक में शामिल हुए हैं। उनके प्रमुख समर्थक वी वैथिलिंगम और पीएच मनोज पांडियन पहले ही द्रमुक में शामिल हो चुके हैं।
दक्षिणी जिलों में मजबूती मिलने की उम्मीद
पनीरसेल्वम अपने खेमे में आखिरी व्यक्ति बचे थे जो किसी पार्टी में शामिल हुए हैं। पिछले महीने ओपीएस और मंत्री पीके शेखर बाबू के बीच हुई बैठक के बाद से अटकलें तेज हो गई थीं कि पूर्व मुख्यमंत्री द्रमुक में शामिल होंगे। अटकलों को और हवा देते हुए, ओपीएस समर्थक पी अय्यप्पन ने कुछ दिन पहले तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास जताया था कि स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार फिर से चुनी जाएगी। ऐसे में ओपीएस और उनके समर्थकों के DMK में शामिल होने से राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी को दक्षिणी जिलों में मजबूती मिलने की उम्मीद है, जहां मुक्कुलाथोर समुदाय का प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा, एक पूर्व AIADMK मुख्यमंत्री का DMK में शामिल होना पार्टी के विस्तार और राजनीतिक प्रभुत्व का प्रतीक भी है।
संभावित चुनौतियाँ
हालांकि, यह गठजोड़ पूरी तरह सहज नहीं है। DMK के स्थानीय कार्यकर्ता, जो वर्षों तक OPS के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे, अब उन्हें सहयोगी के रूप में स्वीकारने को मजबूर होंगे। इससे आंतरिक असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम लक्ष्य केवल जीत है और जीत के बाद सभी को समायोजित करने के अवसर मिलेंगे।
OPS के लिए अस्तित्व की लड़ाई
OPS की छवि हमेशा एक शांत, वफादार और धैर्यवान नेता की रही है लेकिन इस बार उन्होंने प्रतीक्षा के बजाय पहल का रास्ता चुना है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दक्षिण तमिलनाडु के मतदाता इस कदम को कैसे देखते हैं। क्या यह व्यावहारिक राजनीति है या फिर सिद्धांतों से समझौता? OPS के अपने खेमे में लाकर स्टालिन ने एक तरह से कांग्रेस को भी सख्त संदेश देने की कोशिश की है, जो चुनावों में अधिक सीटें देने और सत्ता में हिस्सेदारी के लिए DMK से सौदेबाजी कर रही है। स्टालिन ने कांग्रेस को संदेश दे दिया है कि अब राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में उनके पास एक मजबूत चेहरा है। ऐसे में वह किसी के दबाव में नहीं आएगी।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


